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'मेरे हजारों बेटे-बेटी सड़कों पर, हमें न्याय की उम्मीद...', बोले ट्रेनी लेडी डॉक्टर के पिता

पीड़िता के पिता ने कहा कि मेरी बेटी काफी मेहनती थी, उसे डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए कड़ी मेहनत की थी. उन्होंने कहा कि बेटी के साथ हुई घटना का बार-बार जिक्र कर दुख होता है. साथ ही कहा कि बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहा है, हम न्याय चाहते हैं.

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लेडी डॉक्टर के साथ दरिंदगी के बाद हत्या के मामले में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं
लेडी डॉक्टर के साथ दरिंदगी के बाद हत्या के मामले में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं

कोलकाता में ट्रेनी महिला डॉक्टर से दरिंदगी के बाद हत्या के मामले में देशभर में उबाल है. वहीं, पीड़िता के पिता ने कहा कि हमें इन्वेस्टिगेटिव टीम के ऊपर पूरा भरोसा हैं. हमें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी गई है, लेकिन मुझे लगता है कि मेरे हजारों बेटे-बेटी फिलहाल सड़कों पर हैं. हम इस आंदोलन के साथ है. हमें जस्टिस चाहिए, सबको कड़ी से कड़ी सजा मिले.

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पीड़िता के पिता ने कहा कि मेरी बेटी काफी मेहनती थी, उसे डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए कड़ी मेहनत की थी. उन्होंने कहा कि बेटी के साथ हुई घटना का बार-बार जिक्र कर दुख होता है. साथ ही कहा कि बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहा है, हम न्याय चाहते हैं, जिसने इस वारदात को अंजाम दिया है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. 

बता दें कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष लगातार दूसरे दिन पूछताछ के लिए सीबीआई के समक्ष पेश हुए. शुक्रवार को एजेंसी संदीप घोष को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी, जो शनिवार को 1.40 बजे तक जारी रही. 

एक अधिकारी ने बताया कि संदीप घोष को शुक्रवार रात 9.30 बजे तक सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित सीबीआई के सिटी ऑफिस के एक कमरे में बैठाया गया था, इसके बाद उनसे पूछताछ शुरू हुई. संदीप घोष शनिवार सुबह करीब 10.30 बजे दूसरी बार पूछताछ के लिए सीबीआई ऑफिस पहुंचे. 
अधिकारी ने बताया कि पहले दिन पूछताछ के दौरान संदीप घोष से पूछा गया कि लेडी डॉक्टर की मौत की खबर मिलने के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी, उन्होंने परिवार को किससे सूचित करने को कहा और पुलिस से किसने और कैसे संपर्क किया. 

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अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि कुछ जवाब उलझे हुए थे, उनसे शनिवार सुबह तक पूछताछ की गई और फिर उन्हें घर जाने दिया गया. शुक्रवार रात पूछताछ के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने साप्ताहिक रोस्टर के बारे में पूछताछ की, क्योंकि पीड़ित को 36 घंटे या कभी-कभी 48 घंटे तक की ड्यूटी पर रखा जाता था. 

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