दुष्कर्म के मामले में टिप्पणी कर आरोपी को जमानत देने वाले केरल की अदालत के चर्चित जज का तबादला कर दिया गया है. उनके अलावा 3 अन्य जजों का भी ट्रांसफर हुआ है.
जानकारी के मुताबिक कोझीकोड के जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस कृष्णकुमार को कोल्लम के श्रम न्यायालय का पीठासीन अधिकारी बना दिया गया है.
ये दो टिप्पणियां रहीं थी चर्चित
1. लेखक और एक्टिविस्ट सिविक चंद्रन को यौन उत्पीड़न के मामले में न्यायाधीश एस कृष्णकुमार ने जमानत देते हुए कहा था कि महिला ने खुद ऐसी पोशाक पहनी हुई थी, जो यौन उत्तेजक थी. लेखक ने जमानत याचिका के साथ महिला की तस्वीरें भी अदालत में पेश की थीं.
कोर्ट ने आदेश में कहा था कि जमानत याचिका के साथ पेश की गई तस्वीरों से पता चलता है कि शिकायतकर्ता खुद ऐसे कपड़े पहने हुए थी, जो यौन उत्तेजक थे. इसलिए आरोपी के खिलाफ धारा-354 A का केस प्रथम दृष्टतया नहीं बनता.
कोर्ट ने पीड़िता की शिकायत पर अविश्वास जताया, जिसमें कहा गया था कि 74 वर्षीय शारीरिक रूप से अक्षम आरोपी चंद्रन जबरदस्ती शिकायतकर्ता को अपने गोद में रख सकता है और ब्रेस्ट दबा सकता है.
2. सिविक चंद्रन के मामले में ही न्यायाधीश एस कृष्णकुमार ने कहा था कि आरोपी के खिलाफ अपराध साबित नहीं होता, क्याोंकि यह विश्वास करने योग्य नहीं है कि पीड़िता के अनुसूचित जाति से होने की जानकारी के बाद भी आरोपी ने महिला को छुआ.
कोझीकोड सत्र अदालत ने SC/ST अधिनियम की अलग-अलग धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपी को इस बात की जानकारी होगी कि पीड़िता SC/ST वर्ग से है और उसकी सहमति के बिना इस तरह का कृत्य यौन शोषण में आता है.
कोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए कहा था कि यह बेहद अविश्वसनीय है कि पीड़िता को कथित तौर पर छूने या गले लगाने से पहले आरोपी को उसकी जाति के बारे में कोई जानकारी थी. आरोपी एक सुधारवादी है. सामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहता है.
फरवरी 2020 की है घटना
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने पीड़िता के प्रति यौन उत्पीड़न किया था. जो एक युवा महिला लेखिका है. आरोपी ने फरवरी 2020 में नंदी समुद्र तट पर आयोजित एक शिविर में उसकी शील भंग करने की कोशिश की. कोयलिंडी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 354A(2), 341 और 354 के तहत मामला दर्ज किया था.