भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव के बीच सातवें दौर की वार्ता 12 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के चीनी क्षेत्र मोल्डो में 12 अक्टूबर को होने वाली इस वार्ता के लिए देश के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अफसरों ने शुक्रवार को भारतीय रुख को लेकर चर्चा की.
सरकार के शीर्ष सूत्रों ने आजतक और इंडिया टुडे को बताया कि सोमवार को होने वाली बैठक के एजेंडे पर इस बैठक में चर्चा की गई है.
लद्दाख में तनावपूर्ण स्थिति बनने के बाद दोनों देशों के बीच शांति बहाली को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत का सातवां दौर होगा. अब तक की बातचीत में बनी सहमति पर चीन की ओर से अमल नहीं करने की वजह से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.
भारत का कहना है कि चीन को पूरे पूर्वी लद्दाख क्षेत्र को लेकर चर्चा करनी चाहिए और वहां से सेनाओं को हटाया चाहिए जबकि चीन पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र से परे किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार नहीं है.
पिछले 5 महीने से क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और भारतीय पक्ष विवादित क्षेत्र से सेनाओं को हटाने को लेकर लगातार सख्ती के साथ पेश आ रहा है.
लद्दाख गतिरोध
शीर्ष राजनीतिक नेताओं और सैन्य कमांडरों ने चीन के साथ कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता की संभावित रणनीति पर चर्चा की. यह वार्ता पूर्वी लद्दाख के चुशुल या मोल्डो में आयोजित की जाएगी, जहां इस साल अप्रैल-मई में बने गतिरोध के बाद दोनों पक्षों की ओर से लगभग 50,000 सैनिक तैनात किए गए हैं. भारत का स्पष्ट रुख है कि वार्ता पूरे पूर्वी लद्दाख क्षेत्र से सैनिकों के हटाने को लेकर होनी चाहिए.
सातवें दौर की वार्ता अंतिम होगी जिसमें फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के वर्तमान कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह शामिल होंगे क्योंकि उनके उत्तराधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन पहले ही लेह पहुंच चुके हैं. लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने पिछले साल अक्टूबर में कोर कमांडर का पदभार संभाला था.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, सीडीएस जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया सहित कई शीर्ष अधिकारी चीन के साथ जारी गतिरोध को खत्म करने की कोशिशों में लगे हैं.