भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख इलाके में पिछले करीब एक साल से जारी सीमा विवाद अब खत्म होता दिख रहा है. गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में ऐलान किया है कि पैंगोंग लेक के पास विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच समझौता हो गया है. दोनों ही देश अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे हटाने को लेकर सहमत हुए हैं, साथ ही अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति को अब लागू कर दिया जाएगा. साथ ही बुधवार से इस प्रक्रिया को लागू करना शुरू कर दिया गया है.
आपको बता दें कि राजनाथ सिंह की ओर से गुरुवार को तब बयान दिया गया, जब एक दिन पहले ही पैंगोंग लेक से दोनों सेनाओं के पीछे हटने की बात सामने आई और अब सरकार ने संसद के जरिए इसका आधिकारिक ऐलान कर दिया.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में क्या कहा?
अपने वक्तव्य में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि पूर्वी लद्दाख सीमा पर चीन द्वारा पिछले साल भारी संख्या में गोला-बारूद इकट्ठा किया गया था. इस दौरान हमारी सेनाओं ने चीन के खिलाफ उपयुक्त जवाबी कार्रवाई की थी. सितंबर से दोनों पक्ष एक दूसरे के साथ बातचीत की. LAC पर यथास्थिति करना ही हमारा लक्ष्य है. रक्षा मंत्री बोले कि चीन ने 1962 के वक्त से ही काफी हिस्से पर कब्जा किया है. भारत ने चीन को बॉर्डर के हालात का रिश्तों पर असर पड़ने की बात कही है.
‘एक इंच जमीन नहीं लेने देंगे’
राज्यसभा में राजनाथ सिंह ने कहा कि बातचीत के लिए हमारी रणनीति पूरी तरह से स्पष्ट है, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्देश भी है कि हम अपनी एक इंच जमीन भी किसी और को नहीं लेने देंगे. हमारे दृढ़ संकल्प का ही यह फल है कि हम समझौते की स्थिति पर पहुंच गए हैं.
कैसे और कब से पीछे हटेंगी सेनाएं?
पूर्वी लद्दाख इलाके में पैंगोंग लेक के पास की स्थिति पर राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत और चीन ने पैंगोंग लेक के साउथ और नॉर्थ इलाके में पीछे हटने का फैसला किया है. इसके अनुसार, फॉरवर्ड इलाकों में दोनों देशों ने जो सेनाओं की तैनाती की है उसे चरणबद्ध तरीके से पीछे हटाया जाएगा. राजनाथ ने कहा कि हमने इस बातचीत में कुछ भी खोया नहीं है.
रक्षा मंत्री द्वारा यह भी बताया गया है कि दोनों देशों के बीच पेट्रोलिंग और तैनाती से जुड़े कुछ विषयों पर चर्चा बची है, जो आने वाली बातचीत में होनी है. भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर नौ राउंड की बात हुई है, इसके अलावा राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा हुई है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा बताया गया कि जब दोनों सेनाएं पूरी तरह से हट जाएंगी, उसके बाद भी 48 घंटे के भीतर दोनों देशों के बीच बैठक होगी. चीन अपनी सेना की टुकड़ी को नॉर्थ बैंक में फिंगर 8 के पूर्व में रखेगा, भारत फिंगर 3 के पास अपने परमानेंट बेस पर रखेगा. ऐसा ही तरीका साउथ बैंक के पास अपनाया जाएगा. अप्रैल 2020 के बाद दोनों देशों ने नॉर्थ और साउथ बैंक पर निर्माण किया है, उसे हटाया जाएगा. हाल के कुछ वक्त के लिए अस्थाई स्तर पर पेट्रोलिंग को खत्म कर दिया गया है.
भारत और चीन के बीच कब से और क्या था विवाद?
आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख इलाके में मार्च-अप्रैल 2020 में विवाद शुरू हुआ था. तब पूर्वी लद्दाख के इलाके में चीनी सेना ने घुसपैठ की थी और तय LAC को पार किया था. इसके बाद चीन की ओर से पीछे हटने से मना किया गया, जिसके बाद दोनों सेनाओं मे विवाद बढ़ गया. जून 2020 में भारत-चीन के बीच संघर्ष हुआ और भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे.
तब से लेकर अबतक बड़ी संख्या में दोनों देशों ने बॉर्डर पर अपने जवानों की तैनाती की थी. सर्दी में भी भारतीय सेनाओं की तीनों टुकड़ियां लद्दाख में तैनात थीं. इस दौरान कई मौकों पर भारत-चीन के बीच बात हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था. हालांकि, अब सरकार द्वारा समझौते का ऐलान कर दिया गया है.