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खास आरोपी को बचाने की कोशिश, FIR में घालमेल... लखीमपुर हिंसा पर 'सुप्रीम' सुनवाई की बड़ी बातें

लखीमपुर खीरी हिंसा (Lakhimpur Kheri Violence) मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि खास आरोपी के बचाव में जांच दल सबूत जुटा रहा है.

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लखीमपुर खीरी घटना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी
लखीमपुर खीरी घटना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लखीमपुर खीरी घटना पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी
  • सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार, SIT को फटकारा

लखीमपुर खीरी हिंसा (Lakhimpur Kheri Violence) मामले पर सोमवार को अहम सुनवाई के वक्त सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणियां की हैं. कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि उसे मामले की जांच कर रही SIT टीम पर भरोसा नहीं है, इसलिए जांच की निगरानी के लिए रिटायर्ड जज की नियुक्ति जरूरी है.

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इसके अलावा कोर्ट ने FIR में हो रहे घालमेल पर भी आपत्ति जताई और कहा कि जांच दल खास आरोपी के बचाव में सबूत जुटा रहा है. चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की. यूपी सरकार की तरफ से पूर्व सॉलिस्टर जनरल ऑफ इंडिया हरीश साल्वे पक्ष रख रहे थे.

लखीमपुर हिंसा केस पर 'सुप्रीम' सुनवाई की अहम बातें

- हरीश साल्वे ने कहा कि हमने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है. इसपर चीफ जस्टिस बोले कि आपकी स्टेटस रिपोर्ट ऐसी नहीं है जैसा हमने कहा था, इसमें कुछ नया नहीं है.

- चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने आपको (यूपी पुलिस) और वक्त दिया था, लेकिन कुछ नया नहीं हुआ. लैब रिपोर्ट अबतक नहीं आई हैं. इसपर हरीश साल्वे ने कहा कि वे 15 नवंबर तक आ सकती हैं.

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- कोर्ट ने आगे पूछा कि मोबाइल टावर से मोबाइल डेटा का क्या हुआ? उनको ट्रैक करने के लिए क्या किया? आशीष मिश्रा और गवाहों के फोन के अलावा आपने किसी का फोन ट्रैक क्यों नहीं किया? कोर्ट ने पूछा कि क्या अन्य आरोपियों के पास मोबाइल फोन ही नहीं था?

- आगे जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि एक विशेष आरोपी को 2 एफआईआर में ओवरलैप करके लाभ दिया जा रहा है. उसके बचाव में सबूत जुटाए जा रहे हैं.

- जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा कि मामले में दो FIR हैं, दोनों में घालमेल नहीं होनी चाहिए. जस्टिस ने कहा कि एक आरोपी को बचाने के लिए दूसरी FIR  में एक तरह से सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं. इसमें पहली FIR संख्या 219 (किसानों को गाड़ी से कुचलने से जुड़ी) और दूसरी FIR संख्या 220 (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) है. 

- कोर्ट ने कहा कि SIT जो इस मामले की जांच कर रही है वो दोनों FIR के बीच अंतर नही कर पा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों FIR की अलग-अलग जांच होनी चाहिए. अलग-अलग ही चार्जशीट दाखिल होनी चाहिए. किसी तरह का घालमेल ना हो.

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- कोर्ट में मृतक ड्राइवर श्याम सुंदर की पत्नी के वकील ने कहा कि इस केस की जांच CBI से कराई जानी चाहिए. इसपर कोर्ट ने कहा कि सीबीआई को मामला सौंपना कोई हल नहीं है.

- सुनवाई में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पत्रकार रमन कश्यप की मौत कार से कुचलकर हुई. पहले कंफ्यूजन था कि क्या वो आशीष मिश्रा की टीम का हिस्सा था, जिसको भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था. लेकिन बाद में पता लगा कि वो भीड़ का हिस्सा थे और कार से कुचले गए.

- कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले में हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को नियुक्त करना चाहते हैं ताकि दोनों FIR के बीच अंतर हो, उसी तरह आगे जांच हो. कोर्ट की तरफ से पंजाब हाई कोर्ट के पूर्व जज रंजीत सिंह और राकेश कुमार का नाम सुझाया गया.

- सुप्रीम कोर्ट ने आगे यूपी सरकार को हाईकोर्ट से रिटायर्ड किसी जज का नाम सुझाने को कहा. हरीश साल्वे ने इसपर सोचने का वक्त मांगा. अब शुक्रवार (12 नवंबर) को अगली सुनवाई होगी.

 

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