दिल्ली के बेबी केयर सेंटर फायर केस में खुलासा हुआ था की रजिस्ट्रेशन खत्म होने के बाद भी तमाम नियम कानून को ताक पर रख कर कई नर्सिंग होम चल रहे हैं. आजतक की टीम ने विवेक विहार के कई नर्सिंग होम की पड़ताल की थी और खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड कर कई खुलासे हुए थे. दिल्ली के उपराज्यपाल ने अब मामले का संज्ञान लिया और नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन के मामले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) जांच के आदेश दिए हैं.
मुख्य सचिव को लिखे अपनी चिट्ठी में एलजी वीके सक्सेना ने कहा, "मैंने इस मामले में बहुत सख्त रुख अपनाया है. जिम्मेदारियों के लिए अधिकारियों की तरफ से गंभीरता की कमी से मुझे जनहित में कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है."
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एंटी करप्शन ब्रांच क्या जांच करेगी?
एलजी के आदेश के बाद अपनी जांच में एंटी करप्शन ब्रांच यह देखेगी कि दिल्ली में ऐसे कितने नर्सिंग होम हैं जो वैध रजिस्ट्रेशन के साथ काम कर रहे हैं. करप्शन ब्रांच यह भी आकलन करेगी कि जिन नर्सिंग होम के पास वैध रजिस्ट्रेशन है भी तो क्या वे दिल्ली नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन एक्ट-1953 और उसके तहत बनाए गए नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं.
एक चौथाई नर्सिंग होम के पास रजिस्ट्रेशन नहीं!
उपराज्यपाल ने कहा, "मुझे पता चला है कि 1190 नर्सिंग होम हैं, जिनमें एक चौथाई से ज्यादा बिना वैध रजिस्ट्रेशन के काम कर रहे हैं. शहर में ऐसे कई नर्सिंग होम हैं, जिसने रजिस्ट्रेशन के लिए कभी अप्लाई भी नहीं किया. यहां तक वो नर्सिंग होम जिनके पास वैध रजिस्ट्रेशन है भी तो जरूरी नहीं कि वे कानून और बनाए गए नियमों का पालन कर रहे होंगे."
एलजी ने अपनी चिट्ठी में कहा, "गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करने वाले ऐसे (नियमों का उल्लंघन करने वाले) नर्सिंग होम का अस्तित्व राजधानी में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की गंभीर कमी के बड़े मुद्दे पर भी बहुत कुछ कहता है." उन्होंने कहा, "यह एक बड़ा मुद्दा है जिसे पब्लिक डोमेन में दावों के उलट नेगलेक्ट कर दिया गया है."
अधिकारियों की मिलीभगत की भी होगी जांच!
एलजी ने कहा, "क्या ऐसी कोई चेकलिस्ट है जिसके आधार पर यह तय किया जा सके कि फैसिलिटी जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं... और ये कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और वहां काम करने वाले प्रोफेशनल्स नियमों के तहत काम कर रहे हैं."
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एलजी के निर्देश के मुताबिक, एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच कर सकती है और इस मामले में अपराध और लापरवाही को सामने ला सकती है.
नर्सिंग होम के वेरिफिकेशन का निर्देश
मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे जिलाधिकारियों से वर्किंग नर्सिंग होम की संख्या का पता लगवाएं और दो हफ्ते के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड वेरिफेकेशन कराएं, ताकि उसकी तुलना कुल नर्सिंग होम की लिस्ट से की जा सके. एलजी के मुताबिक, इससे समस्या की भयावहता और शहर में हो रहे उल्लंघनों की सीमा का पता चल जाएगा.''
रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने का निर्देश
एलजी वीके सक्सेना ने कहा, "यह भी मेरे संज्ञान में आया है कि इस युग में भी दिल्ली में नर्सिंग होम के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मैन्युअल रूप से की जाती है, जो विवेक, अस्पष्टता और भ्रष्टाचार के लिए स्पेस मुहैया कराती है." एलजी ने कहा कि मुख्य सचिव यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अनुपालन, पंजीकरण और वैधता के सभी डेटा के साथ एक ऑनलाइन पोर्टल चालू किया जाए, जो कि सार्वजनिक जांच के लिए ओपन हो."