लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद आधी रात को मणिपुर पर चर्चा हुई और सदन ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी दे दी. इस दौरान करीब दो घंटे तक लोकसभा में मणिपुर पर चर्चा हुई. पार्टी लाइन से परे सभी सदस्यों ने इस निर्णय का समर्थन किया, लेकिन राज्य की स्थिति के लिए केंद्र की आलोचना की.
एक संक्षिप्त बहस का जवाब देते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार ने अशांत पूर्वोत्तर राज्य में सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में मणिपुर में कोई हिंसा नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण समाधान के लिए मैतेई और कुकी दोनों समुदायों के साथ बातचीत चल रही है.
उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर स्थिति शांतिपूर्ण है. जब तक लोग शिविरों में हैं, मैं यह नहीं कहूंगा कि स्थिति संतोषजनक है. सरकार मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है." गृह मंत्री ने कहा कि मणिपुर में जातीय हिंसा राज्य के हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी.
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अमित शाह ने दिया पूरा ब्यौरा
उन्होंने कहा, "जिस दिन आदेश आया, हमने हवाई मार्ग से केंद्रीय बलों को भेजा. हमारी ओर से (कार्रवाई करने में) कोई देरी नहीं हुई." उन्होंने कहा कि मई 2023 में शुरू हुई हिंसा में अब तक 260 लोगों की मौत हो चुकी है और उनमें से 80 प्रतिशत लोगों की जान पहले महीने में ही चली गई. शाह ने कहा कि वह पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान हुई हिंसा की तुलना नहीं करना चाहते, बल्कि सदन को 1990 के दशक में पांच वर्षों में नागा और कुकी समुदायों के बीच हुई झड़पों के बारे में बताना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "एक दशक तक छिटपुट हिंसा जारी रही, जिसमें 750 लोगों की जान चली गई. 1997-98 में कुकी-पाइते झड़पें हुईं, जिसमें 352 लोग मारे गए. 1990 के दशक में मैतेई-पंगल झड़पों में 100 से अधिक लोग मारे गए. न तो तत्कालीन प्रधानमंत्री और न ही तत्कालीन गृह मंत्री ने मणिपुर का दौरा किया." गृह मंत्री ने कहा कि ऐसी धारणा बनाई गई है कि हिंसा केवल भाजपा शासन के दौरान ही भड़की, जो सही नहीं है.
विपक्ष ने किया समर्थन
इससे पहले, बहस में भाग लेते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि उनकी पार्टी प्रस्ताव का समर्थन करती है, लेकिन वह राज्य में शांति और स्थिरता की बहाली चाहती है. उन्होंने कहा, "उग्रवाद को समाप्त करें, शांति और स्थिरता बहाल करें, एक-दूसरे के साथ संवाद को बढ़ावा दें, समावेशिता को बढ़ावा दें." टीएमसी की सयानी घोष ने कहा कि उनकी पार्टी भी प्रस्ताव का समर्थन करती है, लेकिन शांति की जल्द बहाली की पक्षधर है.
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डीएमके की के कनिमोझी ने कहा कि मणिपुर में "विभाजनकारी" राजनीति समाप्त होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि सामान्य स्थिति वापस आए, शांति और सद्भाव बहाल हो. हम एक निर्वाचित सरकार का गठन भी चाहते हैं." शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने मणिपुर में मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि शांति बहाल होनी चाहिए.
एनसीपी (एससीपी) की सदस्य सुप्रिया सुले ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है और उन्होंने सामान्य स्थिति वापस लाने में गृह मंत्री से "मजबूत हस्तक्षेप" की मांग की. संविधान के अनुच्छेद 356 (1) के तहत मणिपुर राज्य के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा 13 फरवरी 2025 को जारी की गई घोषणा पर विचार’ प्रस्ताव को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया.