लोकसभा ने एक दिन पहले विनियोग विधेयक 2023 और अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़ी अनुदान मांगों के प्रस्ताव को हंगामे के बीच पारित कर दिया था. लोकसभा से हंगामे के बीच पारित हुए विनियोग विधेयक और अनुदान मांगों को लेकर अब विपक्ष ने सरकार पर हल्ला बोल दिया है. विपक्ष ने महज 12 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान बगैर चर्चा के इसे पारित करने के लिए सरकार पर हमला बोला है.
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार हमला बोलते हुए ट्वीट कर कहा कि बिना चर्चा के बजट को मंजूरी देना संसदीय लोकतंत्र का सबसे खराब संदेश है. उन्होंने कहा कि 2023-24 में 45 लाख 3 हजार 97 करोड़ रुपये बिना जनप्रतिनिधियों के विचार जाने जुटाए और खर्च किए जाएंगे.वहीं, पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला.
तृणमूल कांग्रेस ने भी ट्वीट कर सरकार को घेरा है. तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि संसदीय लोकतंत्र खतरे में है. पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि लोकसभा ने 2023-24 का यूनियन बजट 12 मिनट के भीतर बिना चर्चा के पारित कर दिया. टीएमसी ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों की राय जाने बिना बीजेपी की सरकार 45 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी.
टीएमसी ने इसे शर्मनाक बताया है. गौरतलब है कि एक दिन पहले लोकसभा में हंगामे के बीच शाम 6 बजे विनियोग विधेयक और अलग-अलग मंत्रालयों की अनुदान मांगों से संबंधित प्रस्ताव पेश किया गया था. स्पीकर ओम बिरला ने महज 12 मिनट तक चली कार्यवाही के दौरान हंगामे के बीच विनियोग विधेयक और अनुदान मांगों के प्रस्ताव पर बगैर चर्चा के वोटिंग कराई. लोकसभा से विनियोग विधेयक और अनुदान मांगों का प्रस्ताव पारित हो गया था.
वित्त विधेयक भी हंगामे के बीच पारित
बता दें कि लोकसभा में वित्त विधेयक भी विपक्ष के हंगामे के बीच ही प्रस्तुत किया गया. शुक्रवार को विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त विधेयक पेश किया. विपक्षी सांसदों की अडानी मुद्दे पर जेपीसी की मांग को लेकर नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही करीब 45 मिनट तक चली और इस विधेयक को वोटिंग के बाद पारित कर दिया गया.