लक्षद्वीप के एनसीपी नेता मोहम्मद फैजल को बड़ी राहत मिली है. लोकसभा सचिवालय ने मोहम्मद फैजल की लोकसभा सदस्यता बहाल कर दी है.
लक्षद्वीप के सांसद पीपी मोहम्मद फैजल को हत्या के प्रयास में दोषी करार देते हुए स्थानीय कोर्ट ने 11 जनवरी को 10 साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद जनप्रतिनिधि कानून के तहत लोकसभा सचिवालय की ओर से उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी. इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव का भी ऐलान कर दिया.
दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून में प्रावधान है कि अगर किसी सांसद और विधायक को किसी मामले में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाती है. इसी कानून के तहत सूरत कोर्ट से मानहानि के मामले में दोषी पाए जाने के बाद राहुल गांधी की भी सदस्यता रद्द कर दी गई थी.
फैजल को केरल हाईकोर्ट से मिली राहत
इसके बाद मोहम्मद फैजल ने निचली अदालत के फैसले को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने उनका कनविक्शन रद्द कर दिया था. हाईकोर्ट के फैसले के बाद उपचुनाव भी रद्द कर दिया गया. हाईकोर्ट के फैसले के बाद मोहम्मद फैजल ने लोकसभा सचिवालय से उनकी संसदी बहाल करने की सिफारिश की थी. अब लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता को बहाल कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे फैजल
इससे पहले मोहम्मद फैजल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में केरल हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए संसद सदस्यता खत्म किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी. मोहम्मद फैजल ने बताया था कि उन्होंने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले के साथ लोकसभा सचिवालय को कोर्ट आदेश और निर्वाचन आयोग के हलफनामे की सूचना दी थी. इतना ही नहीं उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद सदस्यता खत्म किए जाने के फैसले को रद्द करने की मांग की थी.
राहुल के लिए भी जगी उम्मीद
माना जा रहा है कि मोहम्मद फैजल को लेकर ये फैसला राहुल गांधी के लिए भी अहम साबित हो सकता है. दरअसल, अगर राहुल सूरत कोर्ट से मिली सजा को ऊपरी अदालत में चुनौती देते हैं और कोर्ट से उनका कनविक्शन रद्द हो जाता है, तो राहुल गांधी की भी सदस्यता बहाल हो सकती है.