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लखनऊ और बिहार... घर में रखी बंदूक से पिछले 24 घंटे में दो एक्सीडेंटल मौतें..., जानिए हथियार को रखने का नियम क्या है, क्या सावधानियां बरतने की जरूरत?

यूपी और बिहार में घर में रखी बंदूक से पिछले 24 घंटे में दो एक्सीडेंटल मौतें हुई हैं. लखनऊ में लाइसेंसी राइफल से खेल-खेल से 12 साल के लड़के की जान गई है. पटना में साढ़े तीन साल की बच्ची की अवैध पिस्तौल से गोली लगने से मौत हुई है. वैसे तो भारत में शस्त्र रखने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है. बिना लाइसेंस के किसी भी प्रकार का शस्त्र रखना गैरकानूनी है. हथियार रखने के नियम भी बनाए गए हैं.

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भारतीय शस्त्र अधिनियम 1959 और भारतीय शस्त्र नियम 2016 में गन रखने के नियम और शर्तें निर्धारित की गई हैं.
भारतीय शस्त्र अधिनियम 1959 और भारतीय शस्त्र नियम 2016 में गन रखने के नियम और शर्तें निर्धारित की गई हैं.

यूपी के लखनऊ और बिहार के पटना से दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें लाइसेंसी हथियार (बंदूक) रखने में लापरवाही वजह से मासूम बच्चों की जान चली गई है. इन दोनों घटनाओं के बाद लाइसेंसी हथियार (बंदूक) को लेकर बहस छिड़ गई है. पिछले 24 घंटे में दोनों एक्सीडेंटल मौतों से सिस्टम पर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, नियमों की अनदेखी किए जाने के ये पहले मामले नहीं हैं. इससे पहले भी लाइसेंस धारक की लापरवाही का खामियाजा परिवार या अन्य लोगों को भुगतना पड़ा है. आइए जानते हैं कि हथियार रखने के नियम क्या हैं और क्या सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं...

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पहले जान लीजिए कि भारत में आर्म्स एक्ट क्या कहता है? बिना लाइसेंस के फायर आर्म्स रखने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस या कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर सकती हैं. भारत में आर्म्स एक्ट 1857 के सिपाही विद्रोह (मेरठ की घटना) के बाद अस्तित्व में आया. उसके बाद अंग्रेजों ने 1878 का शस्त्र अधिनियम लागू किया, जिसके तहत कोई भी भारतीय तभी हथियार रख सकता था, जब अंग्रेजों को यकीन हो जाए कि वो क्राउन के प्रति वफादार है. आजादी के बाद इस कानून को खत्म कर दिया गया और देश में भारतीय शस्त्र अधिनियम लागू किया गया. यह लाइसेंस राज्य स्तर या राष्ट्रीय स्तर का हो सकता है.

भारत में गन लाइसेंस लेने की पूरी प्रक्रिया क्या है?

भारत में गन कानून बेहद सख्त हैं और हथियार लाइसेंस हासिल करना एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है. इसमें एक साल तक का समय लग सकता है. भारत में हथियार लाइसेंस चाहने वाले व्यक्ति की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए. बंदूक रखने के वैध कारण खेल, फसल सुरक्षा और आत्मरक्षा हैं. लाइसेंस के लिए सबसे पहले आपको अपने नजदीकी पुलिस अधिकारी से संपर्क करना होगा. वे आपके व्यक्तिगत और परिवारिक पृष्ठभूमि का परीक्षण करेंगे. यदि आवश्यक होगा तो आपको पुलिस अधिकारी द्वारा निर्धारित अस्थायी बंदूक द्वारा टेस्ट के लिए भेजा जा सकता है.
- अगर आपको गन लाइसेंस की जरूरत है तो सबसे पहले फॉर्म 4 भरना होगा. लाइसेंस के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन या जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में आवेदन दिया जा सकता है. आवेदन पत्र में व्यक्तिगत जानकारी, गन का जरूरत अनुसार विवरण और अन्य संबंधित जानकारी भरनी होती है. आपको आवेदन के साथ अपने व्यक्तिगत पहचान प्रमाण पत्र, पते का प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होते हैं. 
- आपके दस्तावेज और आवेदन की समीक्षा के बाद पुलिस अधिकारी आपके पृष्ठभूमि और बैकग्राउंड की जांच करेंगे. यह सुनिश्चित करेंगे कि आपके पास बंदूक की अनिवार्यता है या नहीं और आप अनुशासित रूप से इसका उपयोग करेंगे या नहीं? पुलिस आपके आपराधिक रिकॉर्ड, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार की जांच करेगी.
- कभी-कभी आवेदक का साक्षात्कार भी लिया जा सकता है. यदि पुलिस सत्यापन और अन्य प्रक्रियाएं संतोषजनक पाई जाती हैं तो जिला मजिस्ट्रेट या लाइसेंसिंग प्राधिकरण लाइसेंस जारी करता है. यदि आपका आवेदन स्वीकृत होता है तो आपको बंदूक लाइसेंस प्राप्त होगा. इसमें बंदूक की प्रकार, संख्या, आवेदक के नाम, और उपयोग की शर्तें शामिल हो सकती हैं.
- इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय कानूनों और नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा. बंदूक के उपयोग की शर्तों का पालन करना जरूरी है. व्यापारिक और शिक्षात्मक उद्देश्यों के लिए बंदूक लेने की प्रक्रिया भी अलग हो सकती है.

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भारत में गन रखने के नियम क्या हैं?

भारत में गन रखने के नियम बहुत सख्त हैं और इन्हें आर्म्स एक्ट, 1959 और आर्म्स रूल्स, 2016 के तहत नियंत्रित किया जाता है. कुछ मुख्य नियम और प्रक्रियाएं हैं, जिन्हें गन रखने के लिए पालन करना जरूरी होता है.
- भारत में गन रखने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है. बिना लाइसेंस के गन रखना गैरकानूनी है और इसके लिए सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
- लाइसेंस में शर्तें और सीमाएं होती हैं, जैसे गन के प्रकार, उपयोग की शर्तें और नवीनीकरण की अवधि.
- गन लाइसेंस को नियमित अंतराल पर नवीनीकृत कराना जरूरी होता है. आमतौर पर 3 से 5 वर्षों के बाद. नवीनीकरण के लिए आवेदन और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया होती है. लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले नवीनीकरण करवाना अनिवार्य है.
- गन का रजिस्ट्रेश जरूरी होता है. लाइसेंस पर गन की पूरी जानकारी दर्ज होती है. गन को सुरक्षित स्थान पर रखना अनिवार्य होता है और इसका दुरुपयोग भी नहीं होने देना चाहिए.
- गन का ट्रांसफर भी सिर्फ अधिकृत व्यक्तियों को ही किया जा सकता है और इसके लिए अनुमति जरूरी है. गन का उपयोग सिर्फ आत्मरक्षा, खेल या वैध शिकार के लिए किया जा सकता है.
- गन का उपयोग अवैध गतिविधियों, धमकी या हिंसा के लिए नहीं किया जा सकता है. बिना लाइसेंस के गन रखने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है, जिसमें जेल की सजा और भारी जुर्माना शामिल हो सकता है.
नियमों का उल्लंघन करने पर गन लाइसेंस रद्द किया जा सकता है. इन नियमों का पालन करना हर गन धारक के लिए अनिवार्य होता है. भारतीय कानून गन रखने और उपयोग करने के मामले में काफी सख्त है ताकि समाज में शांति और सुरक्षा बनी रहे.

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क्या सावधानियां बरतने की जरूरत?

गन रखने के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं जो आपकी सुरक्षा और अन्य लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करती हैं. लाइसेंस प्राप्त हथियारों को घर में सुरक्षित जगह या लॉकर में रखा जा सकता है.
- गन को हमेशा बंद और अलग जगह रखें, ताकि यह बच्चों और अनधिकृत उपयोग से सुरक्षित रहे. गन का इस्तेमाल सिर्फ जरूरी उद्देश्यों के लिए करें. इस्तेमाल के बाद इसे सुरक्षित तरीके से स्टोर करें.
- स्थानीय कानूनी प्रावधानों और नियमों का पालन करें. बंदूक का गैरकानूनी उपयोग या संग्रहण करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है. लाइसेंस में उल्लिखित बंदूक का अनुमति सीमित समय और स्थान के लिए होती है. इसके बाहर इसका उपयोग ना करें.
- गन को अनधिकृत लोगों के हाथ में ना सौंपे. दुर्घटना की स्थिति में तुरंत मेडिकल हेल्प लें और स्थानीय पुलिस अथॉरिटीज को सूचित करें.

राष्ट्रीय लाइसेंस के लिए क्या प्रोसेस?

राष्ट्रीय लाइसेंस मिलने पर हथियार को देश में कहीं भी आसानी ले जा सकते हैं. राष्ट्रीय लाइसेंस गन लाइसेंस के लिए सबसे पहले आपको जिला कलेक्टर के कार्यालय में आवेदन दायर करना होता है.  यह आवेदन सत्यापन के लिए स्थानीय पुलिस अधिकारियों के पास भेजा जाता है. सत्यापन के बाद पुलिस अपनी रिपोर्ट जिला कलेक्टर के कार्यालय को सौंपती है, जो दस्तावेजों और टिप्पणियों के साथ अंतिम मंजूरी के लिए राज्य के गृह मंत्री के कार्यालय को भेजी जाती है. राज्य के गृह मंत्री द्वारा अनुमोदन के बाद व्यक्ति को लाइसेंस प्रदान किया जाता है. यदि लाइसेंस किसी विशेष राज्य को दिया जाना है तो गृह विभाग द्वारा अनुमोदन पर्याप्त है. भारत में एक शस्त्र लाइसेंस पर कोई व्यक्ति दो हथियार रख सकता है. विशेष परिस्थितियों में और लाइसेंसिंग प्राधिकरण की अनुमति से यह संख्या बढ़ाई जा सकती है.

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भारत में फलता-फूलता अवैध हथियार व्यापार...

देश में अवैध हथियार उद्योग फल-फूल रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में बंदूक रखना सिर्फ स्टेटस सिंबल से ज्यादा है और लोग स्थानीय निर्माताओं से अवैध हथियार खरीदते हैं. इतना ही नहीं, आपराधिक गतिविधियों में शामिल कई लोग कई अवैध हथियार रखते हैं. मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र, उत्तर प्रदेश के शामली और सहारनपुर के अलावा बिहार के मुंगेर में सबसे ज्यादा अवैध हथियार बनाए जाते हैं. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अलावा पाकिस्तान से भी ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी की जा रही है.

पिछले साल की तुलना में जब्ती की संख्या में 340 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखी गई है. बीएसएफ ने 2020 में 750 की तुलना में 2022 में 3,322 हथियार बरामद किए थे. पंजाब पुलिस ने भी 2018 से 2020 के बीच 1,349 अवैध हथियार जब्त किए. ये हथियार गैंगस्टरों को बेचे गए थे. 2018 के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पुलिस ने 74,477 से ज्यादा हथियार जब्त किए, जिनमें से 28,850 हथियार उत्तर प्रदेश से जब्त किए गए. इनमें से सिर्फ 3,742 हथियार लाइसेंसी थे और बाकी अवैध थे. पहले अवैध हथियार सिर्फ देसी पिस्तौल तक सीमित थे, लेकिन हाल ही में अवैध कारखानों में AK 47, AK 57 जैसे अत्याधुनिक हथियार भी बनाए जा रहे हैं. कुछ मामलों में विदेशों से तस्करी करके लाई गई असॉल्ट राइफलें भी पाई गईं. पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हाल ही में हुई हत्या में AN-94 रूसी असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल किया गया था. यह पहली बार था, जब किसी गैंगवार में इतने आधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया गया हो.

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लखनऊ में क्या घटना हुई?

लखनऊ में कृष्णा नगर थाना क्षेत्र के प्रेम नगर इलाके में खेल-खेल में राइफल चलने से 12 साल के बच्चे की मौत हो गई. दरअसल, 12 वर्षीय शिवा और उसका ममेरा भाई दिव्य अपने घर में खेल रहे थे. इसी दौरान शिवा ने घर में रखी लोडेड राइफल उठा ली. दिव्य ने यह देखा तो उसने तुरंत शिवा से राइफल नीचे रखने के लिए कहा लेकिन शिवा नहीं माना और फिर छीनाझपटी में ट्रिगर पर उंगली दब गई और फायर हो गया. घटना में गोली शिवा के पेट में जा लगी. केजीएमयू अस्पताल में डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया. शिवा के पिता बलवीर सिंह पंजाब में बीएसएफ में हवलदार हैं. शिवा के मामा संजय भी लखनऊ में सेक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं. यह लाइसेंसी राइफल शिवा के मामा संजय की थी. 4 जुलाई को वो अपने बेटे दिव्य को लेकर प्रेमनगर आए थे और साथ में राइफल भी लाए थे. शाम को संजय सब्जी लेने के लिए बाजार निकले और इधर दोनों भाई शिवा और दिव्य कमरे में खेल रहे थे.

पटना में क्या घटना हुई?

पटना से सटे मनेर के रूपसपुर में साढ़े तीन साल की बच्ची की गोली लगने से मौत हो गई. घटना 1 जुलाई की है. पिता और बेटी अवैध पिस्तौल से खेल रहे थे. इसी दौरान गोली चल गई और बच्ची की मौत हो गई. इससे पहले बच्ची अनुष्का के पिता हरिओम कुमार ने रूससपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात अपराधियों ने उसकी बच्ची को गोली मार दी, जिससे उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई. जांच में सच्चाई पता चली तो पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने पिस्टल की मैगजीन और कारतूस बरामद किया है.  

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