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'मैं खिलौना हूं क्या?'... फडणवीस कैबिनेट में जगह न मिलने पर छलका NCP नेता छगन भुजबल का दर्द

एनसीपी नेता छगन भुजबल ने मंत्री पद से बाहर होने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि पार्टी में फैसले लेने का तरीका अपमानजनक है. साथ ही उन्होंने पीर्टी में अपनी भूमिका और काम को लेकर भी सवाल खड़े किए.

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छगन भुजबल (फाइल फोटो)
छगन भुजबल (फाइल फोटो)

सीनियर एनसीपी नेता छगन भुजबल ने मंत्रीमंडल में जगह न मिलने पर एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार पर तंज कसा. मंगलवार को उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन्हें कैबिनेट में शामिल करना चाहते थे, लेकिन फैसला अजित पवार ने किया.  

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भुजबल ने कहा कि एनसीपी में फैसले अजित पवार लेते हैं, जैसे बीजेपी में देवेन्द्र फडणवीस और शिवसेना में एकनाथ शिंदे लेते हैं. एक दिन पहले दिए गए अपने बयान 'जहां नहीं चैन, वहां नहीं रहना' पर सफाई देते हुए भुजबल ने कहा कि वह बुधवार को एनसीपी कार्यकर्ताओं और अपनी येवला सीट के लोगों से चर्चा के बाद कुछ कहेंगे.  

भुजबल ने कहा, 'मुझे मंत्री न बनाए जाने का कोई दुख नहीं, लेकिन जो व्यवहार मेरे साथ हुआ, उससे मैं आहत हूं.'  

लोकसभा और राज्यसभा की पेशकश पर सवाल  

नासिक में मीडिया से बात करते हुए भुजबल ने कहा कि उन्हें मई में लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा गया था, लेकिन नाम फाइनल नहीं हुआ. फिर राज्यसभा सीट की पेशकश की गई, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया.  

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उन्होंने कहा, 'मैंने नासिक से लोकसभा चुनाव लड़ने का सुझाव स्वीकार किया. जब मैं राज्यसभा जाना चाहता था, तो मुझे विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा गया. अब मुझे राज्यसभा सीट ऑफर की जा रही है. क्या मैं कोई खिलौना हूं? आप जब कहें खड़ा हो जाऊं और जब कहें बैठ जाऊं? मेरे क्षेत्र के लोग क्या सोचेंगे अगर मैं इस्तीफा दे दूं?'  

कैबिनेट से बाहर होने का दर्द  

भुजबल ने दावा किया, 'मुख्यमंत्री फडणवीस ने मेरी कैबिनेट में शामिल होने की जोरदार सिफारिश की थी. लेकिन हर पार्टी का फैसला उसका प्रमुख करता है. बीजेपी के लिए फडणवीस, शिवसेना के लिए शिंदे और एनसीपी के लिए अजित पवार.'  

रविवार को फडणवीस ने नागपुर में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया, जिसमें 39 नए सदस्य शामिल हुए. इसमें 19 बीजेपी, 11 शिंदे गुट और 9 अजित पवार गुट से थे. भुजबल उन 10 मंत्रियों में थे जिन्हें नई सूची से हटा दिया गया.  

अपमान की बात  

भुजबल ने कहा, 'मुझे लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर तैयार किया गया. मैंने एक महीने तक तैयारी की, लेकिन अंतिम समय में मेरा नाम हटा दिया गया. फिर मुझे बताया गया कि मुझे महाराष्ट्र में रहना चाहिए.' उन्होंने आगे कहा, 'मेरे साथ जो हुआ, वह अपमानजनक है. यह मंत्री पद का सवाल नहीं है, बल्कि मेरे साथ हुए बर्ताव का सवाल है.'  

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भविष्य की योजना  

भुजबल ने कहा कि वह बुधवार को अपने कार्यकर्ताओं और येवला की जनता से चर्चा के बाद आगे की बात करेंगे. उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने अजित पवार से इस मामले पर कोई बात नहीं की.  माराठा आंदोलन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'मैंने ओबीसी समुदाय के पक्ष में खड़े होकर माराठा आंदोलन का विरोध किया था. शायद इसी वजह से मुझे कैबिनेट से बाहर किया गया.'

आखिर में उन्होंने कहा, 'देखते हैं, जहां नहीं चैन, वहां नहीं रहना.'

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