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पुणे पोर्श कांड: जमानत के बावजूद जेल से नहीं छूटेगा आरोपी का पिता, दादा की हो सकती है रिहाई

आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को पुणे जेल से हिरासत में लिया, जहां वह बंद था. कोर्ट ने उसे दो दिन की नई पुलिस हिरासत में भेज दिया. बावधन इलाके में अग्रवाल की फर्म द्वारा निर्मित परियोजना नैन्सी ब्रह्मा रेजीडेंसी के चीप विशाल अडसुल ने इस साल की शुरुआत में अग्रवाल और चार अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.

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पुणे पोर्श कार हादसा (फाइल फोटो)
पुणे पोर्श कार हादसा (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र (Maharashtra) के पुणे में हुए पोर्श कार हादसे में नया अपडेट आया है. मंगलवार जिले की एक कोर्ट ने मामले में आरोपी किशोर के पिता और दादा को जमानत दे दी है. यह मामला मई में हुई घातक दुर्घटना के बाद उनके परिवार के ड्राइवर के कथित अपहरण और गलत तरीके से बंधक बनाने से संबंधित है.

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जुडिशियल मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) ने 17 वर्षीय लड़के के पिता विशाल अग्रवाल और उसके दादा को जमानत दे दी, जिन्हें मई में गिरफ्तार किया गया था. मौजूदा वक्त में दोनो न्यायिक हिरासत में हैं. एजेंसी के मुताबिक, विशाल अग्रवाल को पिंपरी-चिंचवाड़ कस्बे की पुलिस ने एक अलग धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था, जो सलाखों के पीछे ही रहेगा. वहीं, आपोरी के दादा के जेल से बाहर आने की संभावना है.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी किशोर के पिता और दादा ने हादसे के कुछ घंटे बाद 19 मई की रात 11 बजे पुलिस थाने से निकलने के बाद अपने परिवार के ड्राइवर का कथित तौर पर अपहरण कर लिया. इसके बाद, उसे गलत तरीके से अपने बंगले में बंधक बना लिया और उसे यह स्वीकार करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई कि हादसे के वक्त किशोर नहीं, बल्कि ड्राइवर कार चला रहा था. 

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हादसे में हुई थी 2 लोगों की मौत

19 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर इलाके में नशे की हालत में 17 वर्षीय एक किशोर द्वारा चलाई जा रही पोर्श कार ने मोटरसाइकिल सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को टक्कर मार दी. बचाव पक्ष के वकील प्रशांत पाटिल ने मीडिया को बताया कि उनके मुवक्किलों को ड्राइवर के कथित अपहरण और गलत तरीके से बंधक बनाने के मामले में अदालत ने जमानत दे दी है.

एडवोकेट प्रशांत पाटिल ने कहा, "मेरे मुवक्किल जांच एजेंसी के साथ सहयोग करेंगे और अदालत की कड़ी (जमानत) शर्तों का पालन करेंगे." 

पिता-पुत्र की जमानत याचिका पर अपनी दलील में पाटिल ने अदालत को बताया कि 19 मई को यरवदा पुलिस थाने से निकलने के बाद ड्राइवर अपनी मर्जी से अग्रवाल के बंगले में नौकरों के क्वार्टर में चला गया और अगले दिन तक वहीं रहा. बाद में उसके घर वाले आए और उसे ले गए थे.

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अपहरण पर क्या दलील?

प्रशांत पाटिल ने अभियोजन पक्ष के इस दावे का खंडन किया कि ड्राइवर का अपहरण किया गया था और उसे आरोपी के घर में बंधक बनाकर रखा गया था. बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि जब हादसा हुआ, तो किशोर आरोपी के दादा दिल्ली में थे. 

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पिछले महीने एक अदालत ने किशोर न्याय अधिनियम से संबंधित एक मामले में 21 मई को गिरफ्तार किए गए विशाल अग्रवाल को जमानत दे दी थी. बिल्डर पर अभिभावक के रूप में अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहने के लिए मोटर वाहन अधिनियम (MVA) और किशोर न्याय अधिनियम (JJA) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.

निबंध लिखकर कोर्ट से मिली जमानत

25 जून को बॉम्बे हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि लड़के को निगरानी गृह से रिहा किया जाए, क्योंकि किशोर न्याय बोर्ड का उसे हिरासत में रखने का आदेश अवैध था.  

हादसे के बाद, लड़के को हिरासत में लिया गया, लेकिन उसी दिन जेजेबी ने उसे जमानत दे दी. उसने लड़के से सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने को भी कहा.

नरम शर्तों पर मिली जमानत से लोगों में आक्रोश फैल गया, इसलिए पुलिस ने जेजेबी के समक्ष एक आवेदन दायर कर जमानत आदेश में संशोधन की मांग की. 22 मई को बोर्ड ने आदेश दिया कि लड़के को हिरासत में लिया जाए और उसे निगरानी गृह में भेजा जाए.

ब्लड सैंपल की अदला-बदली

हादसे से जुड़े ब्लड के सैंपल की अदला-बदली के मामले में नाबालिग लड़के की मां, सरकारी ससून जनरल हॉस्पिटल के दो डॉक्टर और तीन अन्य न्यायिक हिरासत में हैं. यह मामला किशोर के ब्लड सैंपल्स को उसकी मां के सैंपल से बदलने से संबंधित है. यह इसलिए किया गया था, जिससे रिपोर्ट में यह बताया जा सके कि हादसे के वक्त आरोपी किशोर नशे में नही था. 

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इस बीच, आरोपी किशोरी के बिल्डर पिता की मुश्किलें बढ़ गईं, क्योंकि पुणे जिले में पिंपरी चिंचवाड़ पुलिस ने उसे उसकी एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से जुडड़े धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर लिया.

यह भी पढ़ें: पुणे पोर्श कांड: DNA टेस्ट के लिए कलेक्ट किए गए आरोपी की मां के ब्लड सैंपल

आरोपी के पिता पर नए आरोप

एजेंसी के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने अग्रवाल को पुणे जेल से हिरासत में लिया, जहां वह बंद था. कोर्ट ने उसे दो दिन की नई पुलिस हिरासत में भेज दिया. बावधन इलाके में अग्रवाल की फर्म द्वारा निर्मित परियोजना नैन्सी ब्रह्मा रेजीडेंसी के चीप विशाल अडसुल ने इस साल की शुरुआत में अग्रवाल और चार अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.

उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और महाराष्ट्र स्वामित्व फ्लैट अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि निर्माण फर्म ने कथित तौर पर प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त खुली जगह उपलब्ध नहीं कराई और योजनाओं में बदलाव करके तीन इमारतों को केवल एक खुली जगह दी. इसके साथ ही, अपनी जमीन पर दो 11 मंजिला इमारत का निर्माण करते वक्त हाउसिंग सोसाइटी की अनुमति भी नहीं ली.

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