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सुप्रीम कोर्ट ने सुनी महाराष्ट्र स्पीकर की बात, विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए बढ़ाया समय

सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद स्पीकर ने दोनों पक्षों की तरफ से पेश किए गए दावों के बाद कुल 54 विधायकों को नोटिस जारी किए थे. इसके बाद विधानसभा में सुनवाई शुरू की थी. विधायकों की योग्यता पर सवालिया निशान चस्पा होने वालों में सीएम एकनाथ शिंदे का नाम भी शामिल है.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

शिवसेना शिंदे गुट अयोग्यता मामले में फैसला लेने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधान सभा स्पीकर को और समय दे दिया है. महाराष्ट्र विधान सभा स्पीकर की ओर से शिवसेना विधायक अयोग्यता मामले में विधानसभा सचिवालय ने सुप्रीम कोर्ट से तीन हफ्ते का समय और बढ़ाने की गुहार लगाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र स्पीकर को फैसला करने के लिए दस और दिनों की मोहलत देते हुई लंबित मामलों पर 10 जनवरी 2024 तक फैसला देने को कहा है.  पहले सुप्रीम कोर्ट ने ये समय सीमा 31 दिसंबर तक तय की थी.

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उद्धव ठाकरे गुट कर रहा है जल्द फैसला लेने की मांग
मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और 33 विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने का समय बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि वो शिंदे और उद्धव गुट के विधायको के खिलाफ लंबित अयोग्यता के मामले में 10 जनवरी तक फैसला सुनिश्चित करें. उद्धव ठाकरे गुट अपने बागी विधायकों की अयोग्यता पर जल्द फैसला लेने की लगातार मांग स्पीकर से कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद स्पीकर ने दोनों पक्षों की तरफ से पेश किए गए दावों के बाद कुल 54 विधायकों को नोटिस जारी किए थे. इसके बाद विधानसभा में सुनवाई शुरू की थी. विधायकों की योग्यता पर सवालिया निशान चस्पा होने वालों में सीएम एकनाथ शिंदे का नाम भी शामिल है.

10 जनवरी तक का दिया समय
सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को फैसला लेने के लिए और अधिक समय देने से इंकार करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर कहा कि स्पीकर ने पहले तो कहा था कि अयोग्यता मामले की कार्यवाही 28 दिसंबर को बंद कर दी जाएगी. अब स्पीकर उचित समय विस्तार की मांग कर रहे हैं. पहले निर्धारित समय सीमा को ध्यान में रखते हुए हम स्पीकर को फैसला सुनाने के लिए 10 जनवरी 2023 तक का समय विस्तार देते हैं. 

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सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि दोनों पक्षों ने करीब 2 लाख 71 हजार पन्ने के दस्तावेज दाखिल किए हैं. शीतकालीन सत्र के दौरान भी अध्यक्ष इस पर काम कर रहे हैं. ऐसे में और समय दिया जाए.

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