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'मोदी साहब आपसे कभी मिलें तो कहिएगा...', राज्यसभा चेयरमैन से क्या बोले खड़गे

राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इमरजेंसी से लेकर संविधान संशोधन तक, सत्ता पक्ष के एक-एक वार पर पलटवार किया. उन्होंने सभापति से एक आग्रह भी किया.

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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे

राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इंदिरा गांधी की सरकार के समय हुए 42वें संविधान संशोधन में सेक्यूलरिज्म और सोशलिज्म प्रस्तावना में जोड़े जाने के आरोप पर भी पलटवार किया. उन्होंने कहा कि इंदिरा सरकार ने ही 51-ए जोड़कर कर्तव्य भी बताए. उन्होंने सभापति जगदीप धनखड़ को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आपसे मोदी साहब कभी मिलें तो कहिएगा कि जरा संविधान के तहत चलो. लोग राज्यसभा में बोल रहे हैं, हमको उत्तर देने में बड़ी दिक्कत होती है. 

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने इमरजेंसी को लेकर कहा कि जो गलती हुई है, उसे सुधारना है. दो साल बाद ही इंदिरा गांधी थंपिंग मेजॉरिटी के साथ जीतकर सत्ता में लौटीं. निर्णय तो जनता ही करती है न. उन्होंने ट्रेजरी बेंच को संगम बताते हुए कहा कि हमारे बहुत से लोग उधर गए हैं, बाहर के लोग भी गए हैं, ये संगम है साहब. हर पार्टी से लोग उधर गए. खड़गे ने वॉशिंग मशीन का उल्लेख करते हुए कहा कि उधर जो वॉशिंग मशीन आई है, उसमें आप भी जा सकते हैं और पूरी तरह से साफ होकर बाहर आ सकते हैं.

उन्होंने कहा कि हमने संवैधानिक प्रावधान के तहत देश में जातिगत जनगणना की मांग की है. कमजोर लोगों की बेहतरी के लिए एक रणनीति के साथ काम किया जाए. खड़गे ने कहा कि राजनीति में लोग बदलते रहते हैं. लोग किसी को वोट देते हैं और फिर किसी और को. उन्होंने जिन राज्यों में वोट नहीं मिला, उनके साथ भेदभाव का आरोप सत्ता पक्ष पर लगाया और कहा कि देश में गरीब और गरीब होता जा रहा है और अमीर अधिक अमीर. उन्होंने मणिपुर हिंसा का मुद्दा भी उठाया और सरकार को घेरा.

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11 साल में संविधान मजबूत करने के लिए क्या किया

इससे पहले, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अडल्ट फ्रैंचाइज और महिलाओं को पहले चुनाव से ही वोटिंग राइट्स का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग देश के लिए लड़े नहीं, उनको आजादी और संविधान का महत्व क्या मालूम. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक ने दूसरे सदन में डॉक्टर आंबेडकर और दूसरे नेताओं को ही कोट किया. किसी ने भी ये नहीं बताया कि इनके नेताओं ने संविधान सभा की बैठकों में क्या कहा. ये जुमले वाले लोग देश को भ्रमित कर रहे हैं. खड़गे ने 'सौ बार बोले जाए तो असत्य भी सत्य हो जाता है' मुहावरे का उल्लेख करते हुए कहा कि आपने 11 साल में संविधान को मजबूत करने के लिए क्या किया, ये बताइए ना. 10 साल की यूपीए ने जो किया, मनरेगा और खाद्य सुरक्षा, वही कोरोना काल में लोगों का सहारा बना था. 

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उन्होंने 1951 में हुए पहले संविधान संशोधन को लेकर सत्ता पक्ष के आरोपों को काउंटर करते हुए कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के रिजर्वेशन पर एक फैसले की वजह से इसकी नौबत आई थी और सरदार पटेल, डॉक्टर आंबेडकर भी इस पर नेहरू के साथ थे. खुद आंबेडकर ने दो घंटे तक सदन में इसे डिफेंड किया था. आप उनका भी अपमान कर रहे हो. खड़गे ने पंडित नेहरू की ओर से मुख्यमंत्रियों को लिखी चिट्ठी का जिक्र करते हुए कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर रखा. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को एतराज किस पर है, आरक्षण को सुरक्षित रखने के लिए नेहरू संशोधन कराते हैं तो दलित-आदिवासियों के खिलाफ हो गए?

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आप बड़े किसान हैं या छोटे, मुझे मालूम नहीं...

मल्लिकार्जुन खड़गे ने लैंड रिफॉर्म का जिक्र करते हुए कहा कि आप बड़े किसान हैं या छोटे किसान हैं, ये मुझे मालूम नहीं. इस पर सभापति धनखड़ ने कहा कि कृषक पुत्र हूं. खड़गे ने कहा कि 1946 में कैबिनेट मिशन प्लान में नेहरू को वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया था और इसीलिए वह अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री बने. सरदार पटेल ने 14 नवंबर 1949 को नेहरू के जन्मदिन पर बधाई पत्र में लिखा था कि कुछ स्वार्थी लोगों ने हमारे विषय में भ्रांतियां फैलाने की कोशिश की है. हमने एक-दूसरे के मतभेदों का भी सम्मान किया है जैसा कि गहरा विश्वास होने पर ही होता है. उन्होंने कहा कि आज ये झगड़ा लगाने की कोशिश में लगे रहते हैं. खड़गे ने कहा कि यहां संविधान की बात करो. जिनको टीका-टिप्पणी करते हो, उनके पत्र देखो. ये सब देखने के बाद कुछ कहें तो हम कहेंगे, सोचेंगे. 

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उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में संविधान के श्रेय को लेकर कटाक्ष किया. बाबा साहब ने संविधान सभा में कांग्रेस ने खुद क्या कहा है, खड़गे ने उसे भी कोट किया और कहा कि तुम तो शुरुआत से ही उनका सम्मान नहीं कर रहे, यह खुद उन्होंने भी कहा है. जब संविधान, तिरंगा झंडा स्वीकृत हो गए, तब मुंबई के रेलवे स्टेशन पर हिंदू महासभा, संघ वालों ने जाकर भगवा झंडा दिखाया. तब बाबा साहब ने कहा था कि क्या मैं इस झंडे को देखने के लिए यहां आया हूं. मेरा झंडा अलग है तिरंगा झंडा. उन्होंने कहा कि आज ये बोलते हैं कि आंबेडकर, नेहरू जी के खिलाफ थे. खुद बाबा साहब ने कहा कि ये जो सम्मान मिला और कांग्रेस की वजह से मिला. स्मूथली ये संविधान बना सका तो कांग्रेस की वजह से. बाबा साहब ने संविधान के लिए पूरा श्रेय कांग्रेस को दिया.

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