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भारत में सबसे ज़्यादा प्री-मैच्योर डिलीवरी क्यों, ज़िम्मेदार कौन?: दिन भर, 23 मई

लोकसभा चुनाव से पहले ऑपोजिशन यूनिटी को लेकर कई स्तर पर प्रयास चल रहे हैं. आज कोलकाता में दिल्ली के सीएम ने ममता बनर्जी से मुलाक़ात की, तो बंगाल में आज क्या सियासी खिचड़ी पकी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं. उन्होंने सिडनी में आज भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित किया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे. दोनों नेताओं के भाषणों की अहम बातें क्या रहीं और आने वाले समय को देखते हुए इंडिया-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों की दशा-दिशा क्या होगी. दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देते हुए पहलवानों को एक महीना हो गया है. आज शाम इंडिया गेट पर कैंडल मार्च भी निकाला गया. इस कैंडल मार्च का अपडेट लेंगे और उनकी आगे की रणनीति क्या होगी. प्री-टर्म डिलीवरी यानी 9 महीने पूरे होने से पहले पैदा होने वाले बच्चों की संख्या इंडिया में सबसे ज़्यादा हैं. तो प्री-टर्म डिलीवरी के साथ क्या रिस्क इन्वॉल्व हैं, और इस समस्या की जड़ में क्या वजहें हैं, सुनिए 'दिन भर' में

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ये दोस्ती पक्की है?
 

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दिल्ली में अफ़सरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे पर दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच तलवारें खिंची हैं. आठ साल तक ये मामला सुप्रीम कोर्ट में चला, जिसके बाद 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने ऑर्डिनेंस का अड़ंगा लड़ा दिया.  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस अध्यादेश को कोर्ट में चुनौती देने के साथ साथ संसद में भी गिराने की रणनीति बना रहे हैं. और इसके लिए वह विपक्षी नेताओं का समर्थन जुटा रहे हैं. पिछले दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से उन्होंने मुलाक़ात की थी. इसी सिलसिले में आज वह कोलकाता पहुंचे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठक की. इस दौरान उनके साथ पंजाब के सीएम भगवंत मान भी मौजूद रहे. मुलाक़ात के बाद तीनों नेताओं की एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई. जिसमें ममता बनर्जी ने कहा कि दिल्ली सरकार के खिलाफ केंद्र के लाए गए अध्यादेश का टीएमसी राज्यसभा में विरोध करेगी. उन्होंने इस मुद्दे पर सभी पार्टियों से साथ आने की अपील भी की.

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ममता सभी ऑपोजिशन पार्टियों से साथ आने की अपील ज़रूर कर रही हैं. लेकिन उनकी भी महत्वाकांक्षा वही है जो अरविंद केजरीवाल की है. मतलब दोनों नेता सेम इंटेरेस्ट शेयर करते हैं. पहले भी कई बार दोनों नेता एक साथ मंच साझा कर चुके हैं और काफी घनिष्ठता दोनों के बीच देखी गई थी भी. हालाँकि पिछले साल गोवा चुनाव में दोनों की पार्टियां आमने सामने भी थीं. तो आज की इस मुलाक़ात को पॉलिटिकल चश्मे से कैसे देखा जाना चाहिए? सुनिए 'दिन भर' में

 

इंडिया-ऑस्ट्रेलिया का याराना!

अपने पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां मौजूद भारतीय मूल के लोगों से ये वादा किया था कि अगली बार उन्हें किसी भारतीय प्रधानमंत्री को देखने के लिए 28 साल का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. आज नरेंद्र मोदी ने 9 साल पहले किए अपने वादे को पूरा किया और सिडनी में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित किया. सिडनी के एरिना स्टेडियम में नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज़ को सुनने 25 हज़ार से ज़्यादा लोग मौजूद थे. भारतीय प्रधानमंत्री के स्वागत में गर्मजोशी के साथ उमड़ी भीड़ को देख कर ही अल्बनीज़ ने मोदी को बॉस कहा.

नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में एल्बनीज़ को अपना दोस्त बताया और भारत- ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को 3सी, 3डी और 3ई के फ़ॉर्मुले से समझाया, उन्होंने ये भी कहा कि  भारत और ऑस्ट्रेलिया एक दूसरे भले ही कई मायनों में एक दूसरे से अलग हैं, लेकिन कई ऐसी चीज़ें भी हैं, जो उन्हें आपस में जोड़ती हैं.

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भारत के प्रधानमंत्री ने लगभग ने 45 मिनट का भाषण दिया. इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री के स्वागत में सिडनी के आसमान में एक पाइयलट ने वेलकम मोदी लिख कर उनका स्वागत भी किया था. दोनों देश के प्रधानमंत्री ने आज के इवेंट में क्या बड़ी बातें कहीं और इसका सार क्या रहा,  सुनिए 'दिन भर' में

 

एक महीने में क्या मिला?
 

देश के सबसे नामी गिरामी और पदक विजेता पहलवान दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं. ये खिलाड़ी  भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगा रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. आज उनके धरने को एक महीना हो गया. इस पूरे मामले पर दोनों पक्षों से लगातार बयानबाज़ी हो रही है और निशाने साधे जा रहे हैं. कल ही बृजभूषण शरण सिंह ने पहलवानों को नार्को टेस्ट कराने की चुनौती दी थी, जिसे पहलवानों ने मंजूर कर लिया. बजरंग पूनिया ने कहा कि हम सभी किसी भी टेस्ट के लिए तैयार हैं, लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराया जाए. आज पहलवानों की तरफ से इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकाला गया.  सुनिए 'दिन भर' में

 

महिलाओं के लिए ज्यादा घातक, पल्यूशन!

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दुनिया में जन्म लेने वाले सभी इंसानों की मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है, प्री-टर्म बर्थ यानी समय से पहले जन्म. नौ महीने या 37 हफ़्ते से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को प्री-टर्म बेबी कहते हैं, दुनिया में 23 प्रतिशत बच्चे प्री-टर्म होते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के आंकड़े कहते हैं कि साल 2020 में भारत में प्री-टर्म बच्चों की संख्या 30 लाख थी. साल 2020 की ही बात करें तो भारत, पाकिस्तान, नाईजीरिया, चीन, और इथियोपिया को मिला कर दुनिया के 45 प्रतिशत प्री-टर्म बच्चे इन पांच देशों में ही पैदा हुए. रिपार्ट में ये भी कहा गया है कि लो इनकम वाले देशों में ही लगभग 91 प्रतिशत प्री-टर्म बच्चे पैदा होते हैं. ऐसे में ये सवाल उठता है कि प्री-टर्म डिलीवरी के पीछे मुख्य वजहें क्या हैं?  सुनिए 'दिन भर' में

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