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कोलकाता में भी होगी बनारस जैसी गंगा आरती, CM ममता बनर्जी ने दिए घाट डेवलप करने के निर्देश

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता नगर निगम (KMC) के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हुगली नदी पर बने घाटों को बनारस के घाटों की तरह डेवलप किया जाए. उन्होंने कहा कि घाट डेवलपमेंट के काम में किसी भी तरह की जल्दबाजी न की जाए. चाहे इसमें 2 साल ही क्यों ना लग जाएं.

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बनारस में होने वाली गंगा आरती में हजारों लोग शामिल होते हैं. (File Photo)
बनारस में होने वाली गंगा आरती में हजारों लोग शामिल होते हैं. (File Photo)

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बनारस की तर्ज पर गंगा आरती शुरू करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए हुगली नदी पर बने घाटों को डेवलप करने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हुगली के घाटों को बनारस की तरह बनाने के निर्देश दिए हैं.

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सीएम ममता बनर्जी ने सोमवार को राज्य सचिवालय नबन्ना में अधिकारियों के साथ बैठक की. इस मीटिंग में ममता ने कोलकाता नगर निगम (KMC) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि हुगली के किनारे भी वाराणसी जैसे घाटों का निर्माण किया जाए, ताकि यहां गंगा आरती शुरू की जा सके.  

ममता ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि घाट डेवलपमेंट के काम में किसी भी तरह की जल्दबाजी न की जाए. चाहे इसमें 2 साल ही क्यों ना लग जाएं. लेकिन सिस्टम को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जाए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हुगली नदी के किनारे एक जगह खोजें, जहां गंगा आरती शुरू की जा सके. बता दें कि 2011 में बंगाल की सत्ता में वापसी करने के बाद ममता बनर्जी सरकार ने कोलकाता में हुगली नदी के दोनों किनारों को पुनर्निर्मित कराया था.

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दरअसल, बनारस के दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती आकर्षण का केंद्र है. दूर-दूर से वाराणसी घूमने पहुंचने वाले हजारों पर्यटक शाम के समय होने वाली गंगा आरती में शामिल होने घाट पर पहुंचते हैं. एक तरफ घाट पर लोग गंगा आरती करते हैं तो वहीं दूसरी तरफ नाव पर बैठकर कई लोग इसे कैमरे में कैद भी करते हैं. विदेशों से आने वाले पर्यटक भी इसे देखकर काफी आकर्षित होते हैं. 

उत्तर प्रदेश में गंगा (Ganga Aarti) की 13 सहायक नदियों के तटों पर भी गंगा आरती शुरू करने की योजना बन चुकी है. प्रदेश सरकार ने इन सहायक नदियों के किनारे पक्के प्लेटफॉर्म बनाने की योजना तैयार की है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने नमामि गंगे योजना के आयोजनों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इस संबंध में दिशा निर्देश दिए थे.

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