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27 साल से जेल में बंद हत्यारोपी की रिहाई की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

इस मामले में दलील रख रहीं वकील गरिमा पार्षद ने कहा कि पारिवारिक दुश्मनी के चलते यह हत्या हुई थी और दोनों परिवारों के बीच रोष अब भी बरकरार है. वकील गरिमा की दलील के बाद कोर्ट ने पूछा कि क्या 27 साल के बाद भी दुश्मनी अब भी बरकरार है.

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सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने याचिका भी खारिज कर दी. (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने याचिका भी खारिज कर दी. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शख्स पर दर्ज हैं पांच आपराधिक मामले
  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
  • वकील ने कहा परिवार के बीच अब भी दुश्मनी बरकरार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा की एक स्पेशल बेंच ने 27 साल से जेल में बंद एक मुजरिम की रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया. शख्स पर पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं. वह 27 साल से जेल में बंद है और रिमिशन बोर्ड ने उसके आवेदन पर विचार भी नहीं किया है. यह मामला अब कोर्ट में पहुंचा, जिस पर कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी.

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इस मामले में दलील रख रहीं वकील गरिमा पार्षद ने कहा कि पारिवारिक दुश्मनी के चलते यह हत्या हुई थी और दोनों परिवारों के बीच रोष अब भी बरकरार है. वकील गरिमा की दलील के बाद कोर्ट ने पूछा कि क्या 27 साल के बाद भी दुश्मनी अब भी बरकरार है.

वहीं, इस मामले में गौरव अग्रवाल एमिकस क्यूरी के तौर पर पेश हुए थे. वहीं वकील आदित्य धवन उस परिवार के सदस्य की तरफ से पेश हुए थे जिसके परिवार में सभी की हत्या हो चुकी है और परिवार में सिर्फ एक ही शख्स मौजूद है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिलाधिकारी ने इस मामले पर विचार किया है और जमीनी हकीकत से वो वाकिफ हैं.

जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि याचिकाकर्ता के बेटे पर पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं. हम इस मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं. जिसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम इस मामले को यहीं छोड़ते हैं. हम इसमें दखल नहीं दे सकते हैं. पुनर्विचार याचिका को हम यहीं खारिज करते हैं और दोषी की असमय रिहाई की याचिका को खारिज किया जाता है.

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