एनडीए के सहयोगी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग की है. अब इसको लेकर मणिपुर सरकार ने एमएनएफ के बयान की कड़ी आलोचना की है. मणिपुर सरकार के डीआईपीआर द्वारा गुरुवार रात जारी एक प्रेस बयान में, मिजो नेशनल फ्रंट को एक राष्ट्र-विरोधी पार्टी के रूप में उजागर किया गया. इसमें कहा गया है कि एमएनएफ अवैध आव्रजन, हथियारों और ड्रग्स की तस्करी को रोकने और आंतरिक सुरक्षा और रक्षा सुनिश्चित करने के लिए म्यांमार के साथ अपनी खुली सीमाओं पर बाड़ लगाने के भारत सरकार के प्रयासों का विरोध कर रही है.
डीआईपीआर ने बयान में कहा कि मणिपुर सरकार मिजो नेशनल फ्रंट द्वारा मणिपुर के आंतरिक मामलों में लगातार हस्तक्षेप को दृढ़ता से अस्वीकार करती है. मिजोरम स्थित राजनीतिक दल, जिसके मुख्यमंत्री को पिछले राज्य विधानसभा चुनावों में राष्ट्र-विरोधी म्यांमार शरणार्थी प्रचार और मणिपुर विरोधी रुख की तीखी लहर के बावजूद हराया गया था, ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए एक प्रेस बयान जारी किया है.
इसमें 28 नवंबर के बयान पर प्रकाश डाला गया, जो मिजो नेशनल फ्रंट के मीडिया और प्रचार विभाग के महासचिव वीएल क्रोसेनहज़ोवा के नाम से जारी किया गया था. बयान में कहा गया कि लोगों की याददाश्त को ताज़ा करने के लिए यह राजनीतिक दल लगातार एक राष्ट्र-विरोधी पार्टी के रूप में अपना असली रंग दिखा रहा है, जो अवैध आव्रजन, हथियारों और ड्रग्स की तस्करी, आंतरिक सुरक्षा और रक्षा पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पड़ोसी म्यांमार के साथ अपनी खुली सीमाओं पर बाड़ लगाने के भारतीय सरकार के प्रयासों का कड़ा विरोध करता है.
मणिपुर में ड्रग्स और अवैध अप्रवास का कारण म्यांमार
बता दें कि मणिपुर में अवैध अप्रवास और ड्रग्स की समस्या का सबसे बड़ा कारण म्यांमार है. इतिहास में थोड़ा पीछे जाएं तो एमएनएफ ने असम के तत्कालीन मिजो जिले में एक अलगाववादी आंदोलन चलाया था. मणिपुर सरकार ने बयान में कहा कि मणिपुर में चल रहा संकट पड़ोसी म्यांमार से आए अवैध अप्रवासियों की देन है. अवैध अफीम की खेती में लगे अवैध अप्रवासी और मणिपुर में चल रहा संकट म्यांमार से आए अवैध अप्रवासियों की देन है. अवैध अफीम की खेती से प्रेरित होकर राज्य में अवैध रूप से बसने वाले म्यांमार की अर्थव्यवस्था को मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के ड्रग्स के खिलाफ युद्ध के तहत भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
प्रेस ब्रीफ में कहा गया, "यह राज्य सरकार की किसी धार्मिक नीति के कारण नहीं है, जैसा कि एमएनएफ और अन्य निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा, यहां तक कि विदेशी धरती पर और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी, मनगढ़ंत कहानियों के माध्यम से गलत तरीके से चित्रित किया गया है. ऐसा प्रतीत होता है कि मिजो नेशनल फ्रंट ने यह भी आसानी से भूल गया है कि कुकी पक्ष में संघर्ष को नार्को-आतंकवादी तत्वों द्वारा वित्त पोषित किया जाता है."
अवैध प्रवास से बढ़ रही गांवों की संख्या
बयान में कहा गया है कि "अवैध प्रवास" के कारण मणिपुर में कुकी बहुल कांगपोकपी, टेंग्नौपाल, चंदेल, चुराचांदपुर और फेरजावल जिलों में 1969 से गांवों की संख्या (893) में 122 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. तामेंगलोंग, नोनी, सेनापति, उखरुल और कामजोंग के शेष पहाड़ी जिलों में, जो नागा बहुल हैं, इसी अवधि के दौरान वृद्धि केवल 49 है, जो 527 से बढ़कर 576 हो गई है, जो मात्र 9% की वृद्धि है.
इसने मिजो नेशनल फ्रंट को याद दिलाया है कि मिजोरम सरकार ने म्यांमार के नागरिकों को राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भूमि खरीदने और व्यवसाय चलाने से मना किया था.
बता दें कि इनर लाइन परमिट प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए स्वदेशी व्यक्तियों और गैर-स्वदेशी व्यक्तियों को परिभाषित करने के लिए मिजोरम ने 1950 को कट-ऑफ वर्ष के रूप में भी तय किया था. मणिपुर सरकार ने भी ऐसा ही किया था, लेकिन बाद में इसके लिए 31 दिसंबर, 1961 की तारीख तय कर दी. मणिपुर सरकार ने सीएम बीरेन सिंह के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सरकार शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में काम कर रही है. इसने राहत शिविरों में 60,000 से अधिक लोगों को सहायता प्रदान करने और लूटे गए हथियारों को बरामद करने के लिए तलाशी अभियान चलाने जैसे प्रयासों पर प्रकाश डाला.
एमएनएफ ने सीएम का मांगा था इस्तीफा
इससे पहले, गुरुवार को मिजो नेशनल फ्रंट के मीडिया एवं प्रचार विभाग के महासचिव वीएल क्रोसेनहज़ोवा ने एक बयान जारी कर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर निष्क्रियता और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की. क्रोसेनहज़ोवा के बयान में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि मिजो नेशनल फ्रंट मणिपुर में चल रहे संकट पर तत्काल और दृढ़ कार्रवाई की मांग करता है, जिसके बारे में उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार की भयावह विफलता के कारण यह संकट और भी बढ़ गया है.
बयान में इस बात की पुष्टि की गई है कि जातीय संघर्ष के कारण ज़ोफ़ेट भाइयों पर जो पीड़ा हुई है, वह असहनीय स्तर पर पहुंच गई है. सरकार ने शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के अपने प्रयासों का विवरण दिया, जिसमें पुलिस शस्त्रागारों से लूटे गए हथियारों और गोला-बारूद को बरामद करने के लिए तलाशी अभियान शामिल है, जो सफलतापूर्वक जारी है. समय-समय पर कानून तोड़ने वालों को सजा भी मिली है. केंद्र द्वारा गठित एसआईटी मामलों की जांच की निगरानी कर रही है. निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील मामलों को एनआईए और सीबीआई को सौंप दिया गया है. सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जांच आयोग जातीय संघर्ष के मूल की जांच कर रहा है.