मणिपुर के मुख्य सचिव पीके सिंह ने कहा है कि लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को सरेंडर करने के लिए सात दिन का समय काफी है. उन्होंने कहा कि अगर कोई हथियार छोड़ना चाहता है, तो यह एक दिन में भी किया जा सकता है. तय समय सीमा खत्म होने के बाद सुरक्षा बल इन हथियारों को जब्त करने की कार्रवाई करेंगे.
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 20 फरवरी को लोगों से अपील की थी कि वे लूटे गए और अवैध हथियारों को सात दिनों के भीतर बिना किसी सजा के डर के सरेंडर कर दें. मुख्य सचिव पीके सिंह ने कहा, 'हथियारों का आम जनता के पास होना खतरनाक स्थिति है. लूटे गए या अवैध हथियार समाज के लिए खतरा हैं. इनका बरामद किया जाना बेहद जरूरी है.'
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. केंद्र सरकार ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया. इसके पहले मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई थी. गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को 2027 तक के कार्यकाल के बावजूद निलंबित कर दिया गया है.
शांति बहाली की कोशिशें
मुख्य सचिव ने कहा कि 'हाईवे खोलना, सामान्य स्थिति बहाल करना और दोनों समुदायों के बीच विश्वास बढ़ाना बेहद जरूरी है. सभी चाहते हैं कि यह संकट खत्म हो, और समाज में शांति लौटे.'
राज्यपाल की अपील के बाद हथियार सरेंडर
गौरतलब है कि राज्यपाल की अपील के बाद हाल ही में मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के तुइबोंग गांव में असम राइफल्स के सामने 16 हथियार और गोला-बारूद सरेंडर किया गया. सुरक्षा बलों और राज्य प्रशासन के साथ हुई चर्चाओं के बाद जोमी और कुकी समुदाय के नेताओं ने स्थानीय जनसंपर्क किया और 22 फरवरी को चुराचांदपुर जिले के तुइबोंग गांव में स्वेच्छा से पहले लॉट के हथियार समर्पण किए. समर्पित हथियारों में एक एम-16 राइफल, एक 7.62 मिलीमीटर एसएलआर, दो एके राइफल्स, तीन इंसास राइफल्स, दो एम-79 ग्रेनेड लॉन्चर, और अन्य हथियार शामिल थे.