मणिपुर में शांति और व्यवस्था बहाल करने के लिए केंद्र सरकार ने सुरक्षाबलों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. पिछले कुछ दिनों से मणिपुर में सुरक्षा के मुद्दे को लेकर हालात नाजुक बने हुए हैं. दरअसल, संघर्षरत कुकी और मैतेई समुदायों के हथियारबंद उपद्रवी हिंसा में लिप्त हैं, जिसके कारण लोगों की जान जा रही है. सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है. इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने मणिपुर के 3 केस NIA को सौंपे हैं.
केस 1- CRPF और कुकी उग्रवादियों की मुठभेड़ का मामला. दरअसल मणिपुर के जिरीबाम में सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में 10 कुकी उग्रवादियों को मार गिराया था.
केस 2- 6 लोगों के किडनैप का मामला भी NIA को सौंपा गया है
केस 3- जिरीबाम में 6 लोगों के अपहरण के कुछ दिन बाद 3 शव मिले थे. इसमें NIA ने अलग से दर्ज किया है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय मणिपुर में दोबारा हो रही हिंसा से निपटने के लिए बड़े कदम उठा रहा है. इसके तहत CAPF के 2000 जवान भेजे हैं, ज़रूरत पड़ने पर CAPF की और कंपनियां भेजी जाएंगी.
मणिपुर में हिंसक और विध्वंसकारी गतिविधियों में लिप्त होने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रभावी जांच के लिए कुछ मामलों को एनआईए को सौंपा है.
बता दें कि जिरीबाम से सोमवार से लापता (अपह्रत) 6 लोगों में से तीन के शव शुक्रवार शाम असम-मणिपुर के बार्डर पर स्थित जिरीमुख में मिले थे. इन लोगों को कुछ दिन पहले जिरीबाम के कैंप से अगवा किया गया था. शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया है. इनकी लाशें जिरी नदी में बहती दिखीं. कुछ दिन पहले मणिपुर में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कार्रवाई में कम से कम 11 हथियारबंद कुकी उग्रवादियों को मार गिराया था, जो जिरीबाम जिले के बोरोबेकरा में एक पुलिस स्टेशन पर हमला करने आए थे.