पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक ओर कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है तो दूसरी ओर अब पुलिस और सुरक्षाबलों के बीच भी तनातनी होने लगी है. बताया जा रहा है कि मणिपुर पुलिस ने असम राइफल्स के जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है.
पुलिस ने असम राइफल्स के जवानों पर ऑपरेशन में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है. दरअसल, मैतेई समुदाय से जुड़े तीन लोगों की हत्या होने के बाद बिष्णुपुर जिले के क्वाक्ता इलाके में हिंसा भड़क गई थी. पुलिस ने कुकी हमलावरों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया था. इसी ऑपरेशन में असम राइफल्स पर बाधा डालने का आरोप है.
मणिपुर पुलिस का कहना है कि जब वो ऑपरेशन चला रही थी, तभी असम राइफल्स ने अपनी वैन खड़ी कर दी थी, जिससे ऑपरेशन में न सिर्फ बाधा आई, बल्कि कुकी उग्रवादियों को भी भागने में मदद मिली. लिहाजा पुलिस ने असम रािफल्स के जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली.
असम राइफल्स के खिलाफ प्रदर्शन
इसी बीच राजधानी इंफाल में मैतेई महिलाओं ने असम राइफल्स के खिलाफ प्रदर्शन भी किया. ये प्रदर्शन राजधानी के मीरा पैबीस इलाके में हुआ. महिलाएं इलाके से असम राइफल्स के जवानों को हटाने की मांग पर अड़ी थीं. इसके बाद बिष्णुपुर और कांगवाइ के बीच मोइरंग चेक पोस्ट को हटा लिया गया.
अमित शाह से मिलने का इंतजार करते रहे कुकी नेता
कुकी नेताओं और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बीच मंगलवार को मुलाकात होनी थी, लेकिन ये हो नहीं सकी. इंडीजिनियस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) के प्रवक्ता गिन्जा वुअलजोंग ने ऑफ रिकॉर्ड बताया कि एक मीटिंग होनी थी, जिसमें आईबी के ज्वॉइंट डायरेक्टर भी थे. हमसे कहा गया था कि शाम साढ़े छह बजे आकर गृहमंत्री से मुलाकात का समय तय कर लें.
उन्होंने बताया कि गृहमंत्री ने हमें मिलने बुलाया था, क्योंकि उन्होंने हमें अपने लोगों को दफ्नाने से रोक दिया था. गृहमंत्री ने कहा था कि वो सात दिन बाद दफ्नाने की जगह देंगे.
उन्होंने बताया कि हमारी चार प्रमुख मांगे हैं. पहली- मणिपुर से अलग दर्जा, दूसरी- इंफाल जेल से आदिवासी कैदियों की रिहाई, तीसरी- इंफाल घाटी से आदिवासियों के शवों को पहाड़ियों पर लाना और चौथी- पहाड़ी में तैनात सुरक्षाबलों को हटाना.
तीन महीने से जल रहा है मणिपुर
तीन मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने 'आदिवासी एकता मार्च' निकाला. ये रैली चुरचांदपुर के तोरबंग इलाके में निकाली गई.
ये रैली मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ निकाली गई थी. मैतेई समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा देने की मांग हो रही है.
इसी रैली के दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प हो गई. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. शाम तक हालात इतने बिगड़ गए कि सेना और पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियों को वहां तैनात किया गया.
मैतेई क्यों मांग रहे जनजाति का दर्जा?
मणिपुर में मैतेई समुदाय की आबादी 53 फीसदी से ज्यादा है. ये गैर-जनजाति समुदाय है, जिनमें ज्यादातर हिंदू हैं. वहीं, कुकी और नगा की आबादी 40 फीसदी के आसापास है.
राज्य में इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद मैतेई समुदाय सिर्फ घाटी में ही बस सकते हैं. मणिपुर का 90 फीसदी से ज्यादा इलाकी पहाड़ी है. सिर्फ 10 फीसदी ही घाटी है. पहाड़ी इलाकों पर नगा और कुकी समुदाय का तो घाटी में मैतेई का दबदबा है.
मणिपुर में एक कानून है. इसके तहत, घाटी में बसे मैतेई समुदाय के लोग पहाड़ी इलाकों में न बस सकते हैं और न जमीन खरीद सकते हैं. लेकिन पहाड़ी इलाकों में बसे जनजाति समुदाय के कुकी और नगा घाटी में बस भी सकते हैं और जमीन भी खरीद सकते हैं.
पूरा मसला इस बात पर है कि 53 फीसदी से ज्यादा आबादी सिर्फ 10 फीसदी इलाके में रह सकती है, लेकिन 40 फीसदी आबादी का दबदबा 90 फीसदी से ज्यादा इलाके पर है.