मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए केंद्र सरकार ने दूसरी बार समय सीमा बढ़ा दी है. गृह मंत्रालय (MHA) ने 4 दिसंबर को जारी एक गजट अधिसूचना में इस डेडलाइन को 20 मई 2025 तक बढ़ा दिया.
गृह मंत्रालय के मुताबिक “जांच आयोग अधिनियम, 1952” के तहत यह निर्णय लिया गया है. पहले आयोग को अपनी रिपोर्ट छह महीने में सौंपनी थी, लेकिन नवंबर 2023 में इसे 20 नवंबर 2024 तक बढ़ा दिया गया था. अब यह समय सीमा 20 मई 2025 तक बढ़ाई गई है. गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि इसके बाद अब डेट नहीं बढ़ाई जाएगी. ऐसे में कमेटी को हर हाल में रिपोर्ट 20 मई तक ही जमा करना होगा.
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कौन है आयोग में शामिल?
यह तीन सदस्यीय जांच आयोग पूर्व गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा की अध्यक्षता में काम कर रहा है. इसके अन्य सदस्य हैं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हिमांशु शेखर दास और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अलोका प्रभाकर.
क्या है जांच का दायरा?
आयोग का मुख्य कार्य मणिपुर में 3 मई 2023 को शुरू हुई हिंसा के कारणों और इसके फैलने की जांच करना है. साथ ही यह देखना है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक हुई और हिंसा रोकने के लिए उठाए गए कदम कितने प्रभावी थे. आयोग यह भी जांच करेगा कि किसी व्यक्ति, संगठन या अधिकारी की ओर से कोई लापरवाही तो नहीं हुई.
इसके अलावा, आयोग उन शिकायतों और आरोपों की भी सुनवाई करेगा जो किसी व्यक्ति, संगठन या प्रशासन की ओर से दर्ज की जाएंगी.
समय सीमा बार-बार क्यों बढ़ रही है?
मणिपुर हिंसा से जुड़े कई पहलुओं की जांच चल रही है, जिसमें समय लग रहा है. इसके अलावा आयोग को अपनी जांच पूरी करने के लिए पर्याप्त समय देने का भी तर्क दिया जा रहा है.