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मणिपुर: जब्त हथियार और गोला-बारूद ले जा रहे थे सेना के जवान, महिला प्रदर्शनकारियों ने रोका रास्ता

अधिकारियों के मुताबिक सैकड़ों महिलाओं ने सड़क अवरुद्ध कर दी और सेना के काफिले को क्षेत्र से बाहर जाने से रोक दिया. महिला प्रदर्शनकारियों ने सेना के जवानों से यह भी मांग की कि पिछले साल मई में शुरू हुआ संघर्ष खत्म होने तक कोई भी हथियार जब्त नहीं किया जाए.

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 मणिपुर में महिला प्रदर्शनकारियों ने सेना के जवानों को जब्त हथियार और गोला-बारूद ले जाने से रोका. (PTI File Photo)
मणिपुर में महिला प्रदर्शनकारियों ने सेना के जवानों को जब्त हथियार और गोला-बारूद ले जाने से रोका. (PTI File Photo)

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने सेना को जब्त किए गए हथियार और गोला-बारूद ले जाने से रोक दिया. प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व महिलाएं कर रही थीं. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 30 अप्रैल को तड़के कुंबी इलाके में गश्त के दौरान सेना की सेकेंड महार रेजिमेंट के जवानों ने दो एसयूवी को रोका. सेना के जवानों को देखकर दोनों वाहनों में सवार लोग अपने हथियार छोड़कर भाग गए. थोड़ी देर बाद, 'मीरा पैबिस' (मैतेई महिलाओं का नागरिक समूह) मौके पर इकट्ठा हुआ और मांग की कि हथियार उन्हें सौंप दिए जाएं.

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अधिकारियों के मुताबिक सैकड़ों महिलाओं ने सड़क अवरुद्ध कर दी और सेना के काफिले को क्षेत्र से बाहर जाने से रोक दिया. महिला प्रदर्शनकारियों ने सेना के जवानों से यह भी मांग की कि पिछले साल मई में शुरू हुआ संघर्ष खत्म होने तक कोई भी हथियार जब्त नहीं किया जाए. उन्होंने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सेना ने हवा में गोलियां चलाईं, लेकिन उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला. घटना की जानकारी मिलने पर मणिपुर पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे. महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के बाद इस बात पर सहमति बनी कि सेना बाद में हथियार राज्य पुलिस को सौंप देगी. 

महिला प्रदर्शनकारियों के समूह का नेतृत्व कर रहीं जया खगेनबाम ने कहा, 'कुंबी जैसे सीमांत क्षेत्र की रखवाली कर रहे ग्रामीण स्वयंसेवकों से हथियार जब्त करने से हम चुराचांदपुर जिले के निकटवर्ती पहाड़ी इलाकों से सशस्त्र उग्रवादियों के संभावित हमलों के खतरे में पड़ जाते हैं. सुरक्षा बलों को याद रखना चाहिए कि पहाड़ी इलाकों के करीब स्थित इंफाल घाटी के गांवों की रक्षा करने में उनकी असमर्थता के कारण ही ग्रामीण स्वयंसेवकों को हथियार उठाना पड़ा है.' अधिकारियों ने बताया कि स्थिति अब सामान्य है और सेना के जवान अपने निर्धारित बेस पर पहुंच गए हैं. 

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गत 27 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में सुरक्षा बलों के एक कैम्प पर कुकी उग्रवादियों के हमले में सीआरपीएफ के दो जवानों की मौत हो गई थी और दो घायल हो गए. मणिपुर पुलिस ने मृतक सीआरपीएफ जवानों की पहचान सब-इंस्पेक्टर एन सरकार और हेड कांस्टेबल अरूप सैनी के रूप में की. सरकार जहां असम के कोकराझार के रहने वाले थे, वहीं सैनी पश्चिम बंगाल के बांकुरा के रहने वाले थे. हमले में घायल दोनों जवानों की पहचान इंस्पेक्टर जदाब दास और कांस्टेबल मोहम्मद आफताब उल हुसैन के रूप में हुई है. सीआरपीएफ की जिस चौकी पर हमला हुआ, वह इंफाल घाटी के बिष्णुपुर जिले के नारानसेना में स्थित है. 

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