मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने के मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि वह मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में रखने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर अपने पूर्व के रुख पर पुनर्विचार कर रहा है. यानी यू टर्न लेने की तैयारी चल रही है. इस विषय से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कर रही हाई कोर्ट की खंडपीठ में न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा कि केंद्र सरकार को ही इस मुद्दे पर निर्णय लेने की जरूरत है.
कोर्ट ने कहा कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने के मुद्दे का समाधान करने के लिए सिर्फ दो तरीके हैं. अदालत का फैसला या कानून बनाकर. यदि केंद्र अपना रुख स्पष्ट नहीं करता है तो अदालत रिकॉर्ड में उपलब्ध हलफनामे के साथ आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि इस मसले को हल करने का कोई तीसरा तरीका नहीं है. कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार को इस बारे में निर्णय लेने की जरूरत है कि क्या आप जवाबी हलफनामे में जिक्र किए गए अपने रुख पर अडिग रहना चाहते हैं या आप इसे बदलेंगे. यदि आप इसे बदलना चाहते हैं तो हमें अवश्य बताएं. इस पर सरकार की पैरवी करते हुए एएसजी ने अदालत से केंद्र को याचिकाओं पर अगले हफ्ते दलील पेश करने की अनुमति देने का आग्रह किया.
हलफनामे में सरकार ने क्या कहा?
केंद्र सरकार ने अपने पूर्व के हलफनामे में कहा था कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित नहीं किया जा सकता है. क्योंकि, इससे 'विवाह नाम की संस्था' खतरे में पड़ सकती है. इसे पतियों के उत्पीड़न के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन अब सरकार इस मसले से जुड़े कई आयामों पर विचार कर रही है.