डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी के मुखिया गुलाम नबी आजाद की किताब पर सियासी घमासान जारी है. आज़ाद द्वारा कश्मीरी किताब में पंडितों के पलायन का जो जिक्र किया गया है उससे विस्थापित समुदाय नाराज हो गया है. आज़ाद ने तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन पर 1990 के हालातों को गलत तरीके से संभालने का आरोप लगाया है. आज़ाद ने लिखा है कि तत्कालीन सरकार ने न केवल अनुमति दी, बल्कि कश्मीरी पंडितों के पलायन की सुविधा भी दी.
आजाद पर भड़के चांगू
इंडिया टुडे ने इस बारे में जब पनुन कश्मीर के चेयरमैन डॉ. अजय चांगू से बात की तो उन्होंने कहा कि गुलाम नबी आजाद ने कश्मीरी पंडितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने कहा कि आज़ाद एक मुस्लिम सांप्रदायिक नेता हैं जिन्होंने धर्मनिरपेक्ष नेता का चोला ओढ़ लिया है.
क्या है किताब में
कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आजाद की किताब के एक अंश में लिखा गया है,..... 'हालांकि, तथ्य यह है कि पंडितों को परेशान किया गया और कई लोगों ने आतंकवादियों के हाथों अपनी जान गंवाई. अपने जीवन से डरकर, पंडितों ने कश्मीर छोड़ना शुरू कर दिया, अंततः अपने घरों और चूल्हों को त्याग दिया. केंद्र के कुप्रबंधन के कारण कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ, जो सामान्य रूप से कश्मीर के लोगों और विशेष रूप से जनता दल सरकार पर एक धब्बा है. केंद्र के प्रतिनिधि राज्यपाल जगमोहन उस समय जम्मू कश्मीर की सरकार का नेतृत्व कर रहे थे.'
किताब में लिखा गया, 'पर्याप्त सुरक्षा कवर के साथ पंडितों को कश्मीर के कुछ अन्य हिस्सों में स्थानांतरित किया जा सकता था। इसके बजाय, उन्हें न केवल अनुमति दी गई बल्कि तत्कालीन सरकार द्वारा व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन से जम्मू में प्रवास करने की सुविधा भी दी गई, इस प्रकार उनके घरों में उनकी वापसी और भी अधिक जटिल हो गई.'
आजाद की किताब में कई खुलासे
अपनी नई किताब "आजाद: एन ऑटोबायोग्राफी" के बारे में उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की तुलना में 2000 प्रतिशत अधिक कांग्रेसी रहे हैं, जो ट्विटर से काम करते हैं. आजाद ने यह भी कहा कि जब शीर्ष नेतृत्व किसी जांच एजेंसी के सामने पेश होने जा रहा है तो नेताओं को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जैसा कि अभी किया जाता है. कांग्रेस नेता डॉ कर्ण सिंह बुधवार को नई दिल्ली में इस पुस्तक का विमोचन किया.