विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद बीजेपी में हजारों हलचले हैं. आज तीनों राज्यों में पार्टी अपने पर्यवेक्षक तय कर सकती है. पर्यवेक्षको का काम होगा अपने - अपने राज्य में जाना और सीएम पद के लिए नए विधायकों की राय लेना. हालांकि उम्मीद ये थी कि पर्यवेक्षको को लेकर कल ही तय हो जाएगा कि किसे कहां भेजा जाए. लेकिन इसके उलट कल कुछ और तस्वीरें सामने आई. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने दिल्ली में उनके आवास पर देर रात पहुंचीं. उनके साथ बेटे दुष्यंत सिंह भी थे. तीनों के बीच लगभग एक घंटे तक बातचीत हुई. उधर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को भी दिल्ली बुलाया गया. बुलावा मिलते ही वो भी कल देर रात जयपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे. इन बैठकों में क्या बातचीत चली, किन मुद्दों सब रज़ामंद हुए, किन पर मुद्दों पर बात फंसी? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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हर साल यूपीएससी की नतीजे आते हैं तो हमें बड़ी क्यूरिओसिटी होती है कि कौन से स्टूडेंट ने ये परीक्षा क्लियर की. और होना लाज़िमी भी है. क्योंकि इस परीक्षा के लिए स्टूडेंट्स अपने साल - दो साल तो बिना गिने झोंक देते हैं. रिजल्ट आने पर टॉपर्स की तस्वीरें अखबारों से लेकर कोचिंग संस्थानों के बैनर में चमकती है. लेकिन अगर आपने नोटिस किया हो तो अक्सर एक ही टॉपर की तस्वीर कई संस्थानों के विज्ञापन में दिखती है. कोई कहता है कि हमनें इन्हें प्रीलिम्स की कोचिंग दी, कोई कहता है मेन्स हमनें पढ़ाया और कोई इंटरव्यू की तैयारी करवाना, क्लेम करता है. कुछ नहीं मिलता तो कोचिंग संस्थान यही कहकर पोस्टर छाप देते हैं कि हमनें इन्हें पढ़ाई के नोट्स दिए थे. बाद में पता चलता है कि अधिकतम मामलों में ये सब सिर्फ एडवरटाइजिंग होती है. जिसके लिए संस्थान टॉपर्स को साल भर एक तय धनराशि भी देता है. इस पूरे एडवर्टाइजिंग के सिस्टम पर लगाम कसने के लिए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी यानी CCPA ने कुछ कदम उठाएं. हमारी लॉ टुडे की कॉरस्पान्डन्ट अनिशा माथुर ने इस मामले को ट्रैक किया और बताया कि CCPA ने क्या कदम उठाएं और किस आधार पर उठाएं? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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अगस्त में चंद्रयान 3 को चांद के साउथ पोल पर उतारने वाला भारत पहला देश बना था. इस लैंडिंग से लगभग एक हफ्ता पहले विक्रम लैंडर प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग हुआ था. आसान भाषा में कहें तो प्रोपल्शन मॉड्यूल विक्रम लैंडर की सवारी थी. जब लैंडर इससे अलग हुआ तो प्रोपल्शन मॉड्यूल चांद की ऑर्बिट में ही रह गया. ये वहीं था जब तक इसरो ने अचानक इसे वापस पृथ्वी की ऑर्बिट में बुलाने का फैसला किया. इसरो के मुताबिक प्रोपल्शन मॉड्यूल की लाइफ 3 से 6 महीने की थी. लेकिन अब पता चला है कि इसकी लाइफ कई साल लंबी है. प्रोपल्शन मॉड्यूल को वापस क्यों बुलाया गया, इसका पूरा प्रोसेस किस तरह होता है, प्रोपल्शन मॉड्यूल को वापस बुलाना इसरो के प्लान में नहीं था, लेकिन अब इस फैसले के क्या - क्या फायदे हैं? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.