दिल्ली में 4 जून से 25 जून के बीच 27 मोर की मौत हुई थी. यह मामला प्रश्नकाल के दौरान उठा. शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल यशवंत से लेकर मथुरा की सांसद हेमा मालिनी तक ने ये मुद्दा उठाया और सरकार से राष्ट्रीय पक्षी मोर के साथ ही अन्य पशु-पक्षियों की सुरक्षा-संरक्षा को लेकर सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के संबंध में जानकारी मांगी. सरकार की ओर से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन सवालों के जवाब दिए.
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल यशवंत ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मोर की मृत्यु का मुद्दा उठाया. उन्होंने गर्मी के मौसम में 27 मोर की मौत को लेकर सवाल पूछा. इसके जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राष्ट्रीय पक्षी मोर इस भवन (संसद) में भी जगह-जगह है. उन्होंने कहा कि 27 मोर की गर्मी के कारण मौत हुई थी. इनके विसरा को भी जांच के लिए लखनऊ और भोपाल की लैब भेजा गया था. इनकी मौत गर्मी के कारण हुई थी.
मोर की किस्म को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि विश्व में मोर की तीन किस्में पाई जाती हैं. उन्होंने कहा कि भारत में जो मोर पाया जाता है, वह बांग्लादेश, श्रीलंका आदि देशों में पाया जाता है. भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत में जो मोर पाया जाता है, वह सबसे ज्यादा सुरक्षित है. सबसे ज्यादा खतरा कंबोडिया वाले मोर में है. भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार मोर और अन्य पशु-पक्षियों के संरक्षण को लेकर पूरी तरह से संवेदनशील है. एक पेड़ मां के नाम अभियान इसी को लेकर शुरू किया गया है कि ये पशु-पक्षियों के काम आ जाए.
मथुरा से सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि राष्ट्रीय पक्षी मोर सहित कई पक्षियों की संख्या बहुत तेजी से घट रही है. भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा में भी ये काफी कम दिख रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने इसके लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं और इनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं क्या. इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि मोर हमारी पूरी पौराणिक सभ्यता में है. तमिलनाडु के हमारे साथी भी जानते हैं कि भगवान कार्तिकेय की सवारी भी मोर ही है. उन्होंने कहा कि कई पक्षी ऐसे हैं जिनका शिकार किया जाता है और उनके शरीर के कई भागों का अलग तरीके से उपयोग किया जाता है.
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि इसे रोकने के लिए भी हम सख्त मेजर एनसीआरबी के माध्यम से बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि ब्रीडिंग के लिए भी हम काम कर रहे हैं जिसके अपेक्षित परिणाम मिल रहे हैं. यूपी की सलेमपुर संसदीय सीट से सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा कि गिलहरी, सियार जैसे जानवर सड़कों पर रौंदे जा रहे हैं. झाड़ियां खत्म हो गईं. कई जीव ऐसे हैं जो झाड़ियों में ही रहते हैं. इनके लिए क्या सरकार की कोई योजना है. इसके जवाब में मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि हम सड़क वगैरह के लिए परमिशन तभी देते हैं जब जंगली क्षेत्र के आसपास अंडरपास वगैरह को लेकर जांच नहीं कर लेते.