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विरासत में मिली सियासत, चुनाव दर चुनाव कैसे मजबूत होते गए कोनराड संगमा

कोनराड संगमा को राजनीति विरासत में मिली. पढ़ाई पूरी करने के बाद संगमा ने सियासत में कदम रखा और साल 1990 में अपने पिता के प्रचार प्रबंधक के तौर पर राजनीतिक करियर का आगाज किया. पीए संगमा मेघrला की सियासत के साथ ही देश की राजनीति में कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाते थे.

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मेघालय की सियासी पिच पर बेहतरीन पारी खेलने वाले नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष कोनराड संगमा मंगलवार को एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. संगमा को सियासत अपने पिता पीए संगमा से विरासत में मिली. मेघालय की राजनीति में संगमा अपने पिता की तरह एक शक्तिशाली राजनेता के रूप में उभरे हैं जो चुनाव दर चुनाव मजबूत होते जा रहे हैं. राज्य में लगातार दूसरी बार कोनराड संगमा के नेतृत्व में एनपीपी-यूडीपी-बीजेपी गठबंधन की सरकार बनने जा रही है. आखिर कौन हैं कोनराड संगमा और कैसे मेघालय की सियासत के बेताज बादशाह बनकर उभरे हैं?  

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जानें, कौन हैं कोनराड संगमा 

कोनराड संगमा का जन्म 27 जनवरी 1978 को मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले में हुआ. उनके पिता का नाम पीए संगमा है और माता का नाम एसके संगमा है. कोनराड संगमा पढ़ाई-लिखाई में हमेंशा अव्वल रहे. दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया से प्राप्त की. कोनराड संगमा ने फाइनेंस में एमबीए की डिग्री हासिल किया.

विरासत में मिली सियासत

कोनराड संगमा को राजनीति विरासत में मिली. पढ़ाई पूरी करने के बाद संगमा ने सियासत में कदम रखा और साल 1990 में अपने पिता के प्रचार प्रबंधक के तौर पर राजनीतिक करियर का आगाज किया. पीए संगमा मेघालय की सियासत के साथ ही देश की राजनीति में भी अलग पहचान रखते थे. उनकी गिनती कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में होती थी. कोनराड संगमा भी कांग्रेस में रहे लेकिन जब पिता ने कांग्रेस छोड़कर शरद पवार के साथ एनसीपी का गठन किया तो कोनराड भी उनके साथ हो लिए. कोनराड संगमा ने सियासत के सारे दांवपेच उन्होंने अपने पिता से सीखे और आज राजनीतिक बुलंदी पर हैं.

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सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री

कोनराड संगमा ने पहला विधानसभा चुनाव एनसीपी के टिकट पर साल 2004 में लड़ा लेकिन जीत नहीं सके. कोनराड इस हार से हताश नहीं हुए और चार साल के बाद ही 2008 में एनसीपी के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे. कोनराड को मेघालय सरकार में मंत्री बनाया गया और वित्त विभाग जैसी अहम जिम्मेदारी मिली. मेघालय में सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री का रिकॉर्ड बनाने वाले कोनराड ने 10 दिन के भीतर ही प्रदेेश का बजट भी पेश किया. कोनराड ने 2009 तक वित्त विभाग के मंत्री के रूप में काम किया और सूबे की सरकार में कई अहम विभाग भी संभाले.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे

मेघालय में मुकुल संगमा की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार बनी तो 2009 से 2013 तक कोनराड संगमा ने विपक्ष के नेता के रूप में काम किया. एनसीपी से विवाद के बाद अलग होकर पीए संगमा ने जुलाई 2012 में नेशनल पीपुल्स पार्टी नाम से पार्टी बनाई तो कोनराड संगमा पार्टी को मजबूत करने में जुट गए. 2015 में गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद चुनाव में एनपीपी को बड़ी जीत मिली और इसकी क्रेडिट कोनराड संगमा को दी गई. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा के निधन के बाद कोनराड संगमा एनपीपी के अध्यक्ष बने. कोनराड संगमा ने अपने पिता पीए संगमा के निधन के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र तुरा सीट का लोकसभा में प्रतिनिधित्व भी किया. 

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2018 में पहली बार मुख्यमंत्री बने 

कोनराड संगमा की अगुवाई में 2018 के विधानसभा चुनाव में एनपीपी 19 सीटें जीतने में कामयाब रही. कोनराड संगमा ने बीजेपी और अन्य क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर सरकार बनाई और पहली बार मेघालय के मुख्यमंत्री बने. 5 साल तक बीजेपी के सहयोग से सरकार चलाने के बाद  2023 के विधासभा चुनाव से पहले गठबंधन टूट गया और एनपीपी अकेले चुनाव मैदान में उतरी. कोनराड संगमा की पार्टी ने 26 सीटें जीतीं जो पिछले चुनाव से भी अधिक है. पिछली बार से अधिक सीटें जीतने में कोनराड संगमा सफल रहे और अब वे लगातार दूसरी बार मेघालय के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.

संगमा परिवार की सियासत

कोनराड संगमा का पूरा परिवार सियासत में है. कोनराड संगमा के पिता पीए संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री से लेकर केंद्र में मंत्री और लोकसभा के स्पीकर तक रहे. उनके भाई विधायक और बहन अगाथा संगमा मनमोहन सिंह की सरकार में ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री रह चुकी हैं. अगाथा संगमा 15वीं लोकसभा में सांसद चुनी गई थीं. इसके अलावा कोनराड के भाई जेम्स संगमा भी विधानसभा सदस्य हैं. 

कोनराड संगमा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं. वे पीए संगमा फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं, जो ग्रामीण मेघालय में शिक्षा और पर्यावरण के सुधार के लिए काम करता है. मेघालय की सियासत में संगमा परिवार का सियासी वर्चस्व पूरी तरह से कायम है. एक दशक बाद मेघालय की सत्ता में क्षेत्रीय दलों की वापसी का नेतृत्व का चेहरा कोनराड संगमा बने हैं, जिसके आगे बीजेपी भी नतमस्तक है.

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मेघालय में बीजेपी अकेले चुनावी मैदान में उतरकर भी कोई बड़ा सियासी करिश्मा नहीं दिखा सकी. पार्टी की न सीट बढ़ी और न ही वोटबैंक. 2023 के विधानसभा चुनाव नतीजे के बाद बीजेपी एक बार फिर से एनपीपी से गठबंधन कर सरकार में शामिल होने जा रही है, जिसका चेहरा कोनराड संगमा हैं.

 

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