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मेनका गांधी की याचिका पर SC ने जारी किया नोटिस, सुल्तानपुर सीट पर चुनाव में गड़बड़ी का दावा

मेनका गांधी ने सुल्तानपुर सीट पर चुनावी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सपा सांसद राम भुआल निषाद और निर्वाचन आयोग को चार हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया.

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मेनका गांधी (फाइल फोटो)
मेनका गांधी (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर सीट पर हुए लोकसभा चुनाव को चुनौती देने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी सांसद राम भुआल निषाद और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है. मेनका गांधी ने सुल्तानपुर सीट से सपा सांसद राम भुआल निषाद के निर्वाचन को चुनौती दी है.

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मेनका गांधी ने आरोप लगाया है कि राम भुआल निषाद ने नामांकन के वक़्त दाखिल हलफनामे में अपने खिलाफ दर्ज सभी 12 मुकदमों की जानकारी नहीं दी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेनका गांधी की याचिका को खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट का मानना था कि मेनका गांधी ने इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने की समय सीमा खत्म होने के बाद याचिका दाखिल की है.

एससी ने मेनका गांधी की एक याचिका खारिज की

मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी दूसरी याचिका वापस ले ली जिसमें जन प्रतिनिधित्व कानून यानी RP Act के कुछ प्रावधानों को चैलेंज किया गया था. मेनका गांधी की उस दूसरी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया जिसमें मेनका गांधी ने जनप्रतिनिधित्व कानून के उस प्रावधान को भी चुनौती दी थी जिसमें इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने की समय-सीमा का भी उल्लेख किया गया था.

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मेनका गांधी की जनप्रतिनिधित्व कानून के सेक्शन के तहत इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने की समयसीमा (45 दिन) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इंकार करते हुए जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मेनका गांधी की अपील वाली दूसरी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अगर हम इस तरह हस्तक्षेप करना शुरू करते हैं तो कोई भी चुनाव याचिका दायर नहीं कर पाएगा. हर कानून के लिए किसी न किसी तरह की विधायी समीक्षा होनी चाहिए. यदि कानून लागू है तो उसकी समीक्षा होनी चाहिए.

कोर्ट ने मेनका गांधी को दी ये नसीहत

कोर्ट ने कहा कि आपकी याचिका के मुताबिक अगर हम कहते हैं कि 45 दिन उचित नहीं है तो हमें इसके लिए कोई दिन (30-60) हमें निर्धारित करनी होगी. आपकी प्रार्थना के मुताबिक आप हमें यह कहने के लिए नहीं कह सकते कि कानून खराब है क्योंकि आपने अपनी चुनाव याचिका को खारिज करने के खिलाफ यह अपील दाखिल की है.

वहीं गांधी की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि कई मामलों में अदालत ने माना है कि सीमा अधिनियम को बाहर नहीं किया जा सकता है. ऐसे मे कोर्ट हुकुम देव मामले पर दिया गया फैसला पुनर्विचार किया जाए. इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आप इसे याचिका दाखिल कर उठा सकते हैं लेकिन अपील दाखिल कर इसे नहीं मांग सकते.

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