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वंदे भारत स्लीपर और वंदे मेट्रो ट्रेन कब तक चलेगी? रेल मंत्री ने संसद में बताई प्रगति

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को संसद में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब दिया. उन्होंने संसद में वंदे भारत से लेकर अमृत भारत ट्रेनों के नाम गिनाए और ये भी बताया कि लंबी दूरी के लिए वंदे भारत स्लीपर और कम दूरी वाले बड़े शहरों को जोड़ने वाली वंदे मेट्रो ट्रेन पर काम कहां तक पहुंचा. 

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Ashwini Vaishnaw
Ashwini Vaishnaw

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को लोकसभा में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब दिया. रेल मंत्री ने चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप के जवाब दिए, मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और रेल सेफ्टी को लेकर मंत्रालय की ओर से उठाए जा रहे कदमों की भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि रेलवे साधारण मानवी की सवारी है. रेल से गरीब व्यक्ति भी लंबी दूरी की यात्रा कम पैसे में कर पाता है. इसी भावना के साथ 10 साल में कई स्टेप लिए गए जिससे गरीब और मिडिल क्लास के लोगों को सुविधाएं मिल सकें.

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जनरल कोच की संख्या में कमी के आरोप पर रेल मंत्री ने कहा कि करीब-करीब दो-तिहाई जनरल और स्लीपर, एक तिहाई एसी कोच का कॉम्बिनेशन रेलवे में रहा है जो अभी भी है. उन्होंने कहा कि हमने ढाई हजार एक्सट्रा जनरल कोच बनाने का काम हाथ में लिया है जिससे मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में चार जनरल कोच का कॉम्बिनेशन हो जाएगा. 10 हजार जनरल कोच बनाने का काम भी हाथ में लिया गया है जिससे आने वाले समय में जनरल कोच की समस्या कहीं भी नहीं रहेगी. रेल मंत्री ने अमृत भारत ट्रेन की चर्चा करते हुए कहा कि दो अमृत भारत ट्रेन का उद्घाटन हुआ है. पहली ट्रेन मालदा से बेंगलुरु और दूसरी दरभंगा से दिल्ली के लिए चल रही हैं जिनमें आधे स्लीपर और आधे जनरल कोच हैं. पीएम ने 50 और अमृत भारत ट्रेनों के प्रोडक्शन का निर्णय लिया है.

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अमृत भारत ट्रेन की खासियतें गिनाते हुए उन्होंने कहा कि पुरानी डिजाइन के कोच, एलएचबी कोच में गाड़ी स्टार्ट होते ही झटका लगता है. अमृत भारत ट्रेन में नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसमें झटके नहीं लगते. रेल मंत्री ने कहा कि इस ट्रेन के परिचालन के पांच महीने का जो अनुभव है, कई सुधार किए गए हैं जो अगली 50 अमृत भारत ट्रेनों में और इंप्रूव होंगे. पीएम का पूरा फोकस गरीब और मिडिल क्लास पर है और उसीका ध्यान रखते हुए रेलवे काम कर रहा है. उन्होंने विपक्ष के कई सदस्यों की ओर से वंदे भारत ट्रेन की डिमांड का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे लिए ये खुशी की बात है.

रेल मंत्री ने कहा कि जब वर्ल्ड क्लास सेमी हाईस्पीड ट्रेन की बात आई तो ये रिकॉर्ड पे रहे कि पीएम ने स्पष्ट कहा कि पुरानी पद्धति बाहर जाकर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कराने की पद्धति को नकारा. पीएम ने कहा कि हमारे इंजीनियर्स में इतनी क्षमता है कि हम इसे अपने आप डिजाइन करेंगे और इसी विश्वास की मिसाल है ये ट्रेन जो सौ से ज्यादा शहरों तक सेवाएं दे रही है. उन्होंने कहा कि कल एक सदस्य ने भेदभाव की बात कही. पीएम ने स्पष्ट कहा कि ईस्ट से वेस्ट और नॉर्थ से साउथ, हर तरफ वंदे भारत को रोलआउट करना है. रेल मंत्री ने कहा कि वंदे भारत के परिचालन में हर राज्य का ध्यान रखा गया है.

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कम दूरी के शहरों तक चलेगी वंदे मेट्रो

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कम दूरी के बड़े शहरों के लिए एक रीजनल ट्रेन चले, इसके लिए वंदे मेट्रो डिजाइन की गई है. उन्होंने लोकसभा में कहा कि पहली गाड़ी कपूरथला फैक्ट्री से निकल चुकी है. उसकी टेस्टिंग चल रही है और बहुत जल्द इसे लॉन्च कर दिया जाएगा. उन्होंने इस ट्रेन के फीचर्स भी गिनाए और कहा कि इसे दुनियाभर के अच्छे फीचर्स से लैस किया गया है. लंबी दूरी के लिए वंदे स्लीपर डिजाइन की गई है. रेल मंत्री ने कहा कि पहली वंदे स्लीपर ट्रेन की टेस्टिंग चल रही है. वंदे भारत, अमृत भारत, वंदे मेट्रो और वंदे स्लीपर, इन चारो ट्रेन का कॉम्बिनेशन साधारण मानवी की सवारी को एक नया स्वरूप देगा. पिछले साल सात सौ करोड़ लोगों ने रेल से यात्रा की थी, ये उन सबके लिए वरदान साबित होंगी. 

गिनाए पैसेंजर सेफ्टी के लिए कदम

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में पैसेंजर सेफ्टी की दिशा में उठाए गए कदम भी गिनाए. उन्होंने कहा कि मानवरहित क्रॉसिंग सबसे बड़ी समस्या थी, इसे दूर कर लिया गया है. स्टेशंस का पूरा कंट्रोल लेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के माध्यम से होता है. दुनिया के बड़े देशों में 1980-90 के दशक में लग गई थी. अपने यहां स्लो पेस से काम चल रहा था. रेल मंत्री ने कहा कि इसे लेकर पुराने और वर्तमान आंकड़े बताए और कहा कि अब देश के करीब-करीब सभी स्टेशंस को कवर करने का काम चल रहा है. लोकोमोटिव्स में सुधार के लिए नई व्यवस्था लाई गई है- कवच सिस्टम.

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उन्होंने कहा कि सदन में कल कहा गया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री जब रेल मंत्री थीं, तब ऑटोमेटिक डिवाइसेज ट्रेनों में लगवाई गई थीं. एटीपी सिस्टम 1980 से 90 में दुनिया के सभी बड़े ऑपरेटर्स ने इसे अपने यहां लगाया. रेल मंत्री ने कहा कि ट्रेनों की स्पीड बढ़ती जा रही है. तेज स्पीड से गाड़ी चली तो सिग्नल देखने का समय कम होता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 58 साल के कार्यकाल में भी ये टेक्नोलॉजी 2014 तक नहीं लग पाई.

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रेल मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने 2015 में एटीपी डेवलप करने का संकल्प लिया और 2016 में कवच के ट्रायल्स शुरू हुए. 2019 में इसे सील फोर के सर्टिफिकेट मिले जो बड़ा टफ होता है. उन्होंने कहा कि कोविड के बावजूद भी 2020-21 में इसके एक्सटेंडेट ट्रायल्स हुए, तीन मैन्युफैक्चरर्स को चिह्नित किया गया और 2023 में तीन हजार किलोमीटर का प्रोजेक्ट रोलआउट हुआ और आज हम उस स्थिति में है कि दो और मैन्युफैक्चरर्स जुड़ने वाले हैं. रेल मंत्री ने कहा कि हमने आठ हजार से अधिक इंजीनियर्स को प्रशिक्षित किया है, 6 यूनिवर्सिटीज ने इसे अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है. 

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कवच के लिए 9000 किलोमीटर के टेंडर प्रॉसेस में

रेल मंत्री ने कहा कि अब हम 9000 किलोमीटर के टेंडर इन प्रॉसेस हैं और पांच हजार लोकोमोटिव्स पर कुछ ही महीनों में ये लगना शुरू हो जाएगा. हमारा करीब करीब 70 हजार किलोमीटर का रेल नेटवर्क है. उससे आधे नेटवर्क वाले देशों ने करीब-करीब 20 साल लगाए एटीपी इंस्टाल करने में. उन्होंने कहा कि इतना भरोसा दिलाना चाहूंगा कि कवच को इंस्टाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे. सेफ्टी पर बात हो रही है. ट्रैक फेल्योर बड़ा विषय होता था. रेल मंत्री ने यूपीए और एनडीए की सरकार के समय के आंकड़े गिनाए और कहा कि फेज अरे अल्ट्रासाउंड मशीन डेवलप की गई है जिससे ट्रैक में कोई भी गड़बड़ हो तो उसे अच्छे से समझा जा सके. बहुत जगह फिश प्लेट रिप्लेस की गई.

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उन्होंने कहा कि 2013-14 में करीब ढाई हजार रेल फ्रैक्चर्स होते थे जो 2023-24 तक 383 रह गए हैं. इसे जीरो की तरफ ले जाने का प्रयास रहना चाहिए. यूपीए सरकार में 310 एलएचबी कोचेज बने थे, मोदी सरकार में 37 हजार बने हैं. हमें इस पर भी नहीं रुकना है. रेल मंत्री ने कहा कि 1950 वाली टेक्नोलॉजी के जितने भी कोच हैं, उन सबको रिप्लेस करना है. आज के हिसाब से टोटली नए तरीके से डिजाइन का काम भी हाथ में लिया है. उन्होंने कहा कि यूपीए के कार्यकाल में हर साल औसतन 171 एक्सीडेंट होते थे जिसमें करीब-करीब 68 फीसदी कम आई है. इस पर विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. 

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विपक्ष को दी अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत

विपक्ष के हंगामे पर भड़के रेल मंत्री ने कहा कि आज जो ये सवाल पूछ रहे हैं, वे बताएं कि अपने 58 साल के कार्यकाल में एक भी एटीपी क्यों नहीं लगवा पाए. अपने गिरेबान में झांकिए. उन्होंने कहा कि इसी सदन में जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, अपने एक्सीडेंट के नंबर बताती थीं, पॉइंट टू फोर से पॉइंट वन नाइन होने पर ये कितनी तालियां बजाते थे. आज पॉइंट वन नाइन से पॉइंट जीरो थ्री इंडेक्स होने पर सदन में इस तरह की बात करते हैं. ऐसे देश चलेगा क्या. देश चलाने के लिए रेलवे को सुधारने के लिए सबको सहयोग करना पड़ेगा. रेल मंत्री ने कांग्रेस पर झूठ की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि दो करोड़ पैसेंजर्स डेली रेल यात्रा करते हैं. क्या उनके मन में ये भय भरना चाहते हैं? 

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उन्होंने कहा कि रेलवे परिवार 12 लाख कर्मचारियों का है. उनके लिए मेज थपथपाएं. कांग्रेस झूठ की दुकान है और ये झूठ की दुकान नहीं चलेगी. रेल मंत्री ने आरोप लगाया कि ये कभी फौज को नीचा दिखाते हैं, कभी रेलवे को नीचा दिखाने का काम करते हैं. इस तरह की राजनीति नहीं चलेगी. रेलवे में वो ताकत है, वो इंजीनियर्स हैं जो बड़े से बड़े चैलेंज का सामना कर सकते हैं. उन्होंने यूपीए और एनडीए सरकार में रेलवे में नियुक्तियों का आंकड़ा भी सदन में रखा और कहा कि हमने रेलवे में भर्ती के लिए कैलेंडर भी 2024 में जारी किया है. 

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जो रील बनाने में व्यस्त हैं, उनके समय सुविधाएं जीरों थीं

रेल मंत्री ने कहा कि हमने मेंटेनेंस पर ध्यान देने के लिए कार्यप्रणाली में बदलाव किया है. रोलिंग बैक सिस्टम से हर हफ्ते के हिसाब से प्लानिंग करके 26 हफ्ते में काम इतना पहुंचा है जिसका लाभ हमें दशकों तक मिलेगा. उन्होंने कहा कि लोको पायलट का विषय कई माननीय सदस्यों ने उठाया. वे रेल परिवार के बहुत महत्वपूर्ण सदस्य हैं. उनके लिए हमने स्टेप्स लिए हैं. रेल मंत्री ने कहा कि हम केवल रील बनाने वाले लोग नहीं, काम करने वाले लोग हैं. लोको पायलट का सारा कार्यकाल 2005 में बनाए गए नियमों के हिसाब से ही तय होता है. उसी के हिसाब से रनिंग टाइम और रेस्ट टाइम तय होता है. 2016 में हमने इन नियमों में बदलाव कर और अधिक सुविधाएं दी हैं. सभी रनिंग रूम को एसी किया गया है. लोको कैब भी एसी करके लाया गया है. जो आज लोको पायलट के साथ सिम्पैथी दिखाकर रील्स बनाने में व्यस्त हैं, उनके समय में सुविधाएं जीरो थीं.

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