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'औरंगजेब, जो हम मराठों को समाप्त करने आया था, उसे यहीं गाड़ा गया है', छत्रपति संभाजीनगर में MNS ने लगाए पोस्टर

Chhatrapati Sambhajinagar: मनसे ने छत्रपति संभाजीनगर के अलग-अलग हिस्सों में बैनर लगाए हैं, जिनमें औरंगजेब की कब्र की दूरी को किलोमीटर में दर्शाया गया है. यह कब्र खुल्दाबाद में स्थित है, जो छत्रपति संभाजीनगर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है.

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छत्रपति संभाजीनगर में मनसे के पोस्टर.
छत्रपति संभाजीनगर में मनसे के पोस्टर.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने छत्रपति संभाजीनगर शहर में औरंगजेब की कब्र को लेकर एक अनोखा अभियान शुरू किया है. शहर के अलग-अलग हिस्सों में मनसे ने बैनर लगाए हैं, जिनमें औरंगजेब की कब्र की दूरी को किलोमीटर में दर्शाया गया है. यह कब्र खुल्दाबाद में स्थित है, जो छत्रपति संभाजीनगर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है. 

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मनसे का कहना है कि यह अभियान इसलिए चलाया जा रहा है ताकि लोगों को पता चले कि "मराठों पर हमला करने वाला दुश्मन कहां गाढ़ा गया है."

मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने हाल ही में गुडी पाडवा के मौके पर आयोजित सभा में कहा था, "औरंगजेब, जो हम मराठों को खत्म करने आया था, उसे यहीं गाढ़ा गया है. यह इतिहास हर किसी को जानना चाहिए. हमारी अगली पीढ़ी के हर युवा को, हर स्कूली बच्चे को यह बात पता होनी चाहिए." इसी बात को आगे बढ़ाते हुए मनसे ने शहर में यह बैनर अभियान शुरू किया है.

बैनर में क्या लिखा है?
मनसे द्वारा लगाए गए बैनरों में शहर के प्रमुख स्थानों से खुल्दाबाद में स्थित औरंगजेब की कब्र तक की दूरी को साफ-साफ दर्शाया गया है. इनमें शामिल हैं:

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  • क्रांतिचौक से 27 किमी
  • जिला न्यायालय से 26 किमी
  • बाबा पेट्रोल पंप से 25 किमी
  • होली क्रॉस स्कूल से 24 किमी
  • नगर नाका से 23 किमी
  • पडेगांव से 21 किमी
  • शरनापुर से 14 किमी

इन बैनरों का मकसद लोगों में यह जागरूकता फैलाना है कि औरंगजेब, जिसे मराठा इतिहास में एक क्रूर शासक के तौर पर देखा जाता है, उसी महाराष्ट्र की धरती पर दफन है.

छत्रपति संभाजीनगर के मनसे जिला अध्यक्ष सुमित खम्बेकर ने कहा, "हमने ये बैनर इसलिए लगाए हैं ताकि हर किसी को पता चले कि हम पर हमला करने वाला दुश्मन कहां गाढ़ा गया है. यह हमारा इतिहास है और इसे सबको जानना चाहिए. हमारी पार्टी इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि लोग अपने इतिहास से जुड़े रहें और उसे भूलें नहीं."

विवादों में औरंगजेब की कब्र
औरंगजेब की कब्र पहले भी कई बार विवादों में रही है. कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने इसे हटाने की मांग की है, जबकि यह एक संरक्षित स्मारक है, जिसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करता है.  

(रिपोर्ट: इसरारुद्दीन चिश्ती)

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