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महाराष्ट्र में 20 सीटें, आदित्य ठाकरे के खिलाफ MNS कैंडिडेट, BJP के सामने राज ठाकरे ने रख दी डिमांड!

मनसे ने भाजपा से आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में 20 सीटों की मांग की है. मनसे द्वारा दावा की गई अधिकांश सीटें मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) से हैं. 

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मनसे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी से 20 सीटों की मांग की है. (Photo: PTI)
मनसे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी से 20 सीटों की मांग की है. (Photo: PTI)

लोकसभा चुनावों के लिए महाराष्ट्र में एनडीए के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बिना शर्त समर्थन देने के बाद, राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संभावित सीट बंटवारे पर भाजपा के साथ बातचीत शुरू की है. सूत्रों के मुताबिक, मनसे ने राज्य में 20 विधानसभा सीटों की मांग की है. मनसे द्वारा दावा की गई अधिकांश सीटें मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) से हैं. 

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इनमें वर्ली, दादर-माहिम, सेवरी, मगाठाणे, डिंडोशी, जोगेश्वरी, वर्सोवा, घाटकोपर पश्चिम, चेंबूर, ठाणे, भिवंडी ग्रामीण, कल्याण ग्रामीण, नासिक पूर्व, वाणी, पंढरपुर, औरंगाबाद मध्य और पुणे की एक सीट शामिल है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना  वर्ली में आदित्य ठाकरे के खिलाफ संदीप देशपांडे को मैदान में उतार सकती. जबकि नितिन सरदेसाई दादर-माहिम से और शालिनी ठाकरे वर्सोवा से चुनाव लड़ सकती हैं.

इस बीच बीजेपी ने भी आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी है. हाल के लोकसभा चुनावों में भाजपा को जिन राज्यों में झटका लगा, उनमें से एक महाराष्ट्र भी था. यहां भाजपा की सीटें 23 से गिरकर 9 हो गईं. इसने पार्टी के भीतर खतरे की घंटी बजा दी है, क्योंकि राज्य में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं. चुनौतियों और खामियों की पहचान करने और इसके अनुरूप रणनीति बनाने के लिए, महाराष्ट्र भाजपा ने 14 जून को मुंबई में अपनी जिला इकाइयों के अध्यक्षों और पदाधिकारियों की एक बैठक बुलाई है.

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बैठक को संबोधित करने वाले नेताओं में डिप्टी सीएम देवेन्द्र फड़णवीस, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चन्द्रशेखर बावनकुले और मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार शामिल होंगे. 14 जून की बैठक में, भाजपा उन सभी कारकों का विश्लेषण करेगी जिनके कारण लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन खराब रहा. विदर्भ जिसे पार्टी का गढ़ माना जाता है, वहां पार्टी का मानना ​​है कि उसे किसानों के बीच असंमुष्टि के मुद्दे को हल करना होगा. इस क्षेत्र की मुख्य फसलें कपास और सोयाबीन हैं और हाल ही में कीमतों में उतार-चढ़ाव ने किसानों को आर्थिक रूप से प्रभावित किया है.

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