जुलाई महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी रोजगार पोर्टल को लॉन्च किया था. इस पोर्टल के शुरू हुए महज 40 दिन बीते हैं लेकिन अब तक यहां 69 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है. चौंकाने वाली बात ये है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन तो करा लिया लेकिन उसकी तुलना में बेहद कम लोगों को रोजगार मिला है.
रजिस्ट्रेशन और रोजगार की संख्या में भारी अंतर से पता चलता है कि मौजूदा सरकार के सामने रोजगार बड़ी समस्या बन कर उभरी है. कोरोना वायरस की इस महामारी में जिस तादाद में लोग बेरोजगार हुए हैं, उन लोगों को रोजगार मुहैया कराना बड़ी चुनौती है. यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना चाहती है लेकिन इस राह में बेरोजगारी बड़ी समस्या बन कर सामने आ रही है.
'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट बताती है कि महज एक हफ्ते में यानी कि 14 से 21 अगस्त तक रोजगार पोर्टल पर 7 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया. लेकिन जितने लोगों को रोजगार मिला, वह आंकड़ा बेहद कम है. रिपोर्ट बताती है कि रजिस्टर हुए 7 लाख लोगों में केवल 691 लोगों को रोजगार मिल पाया. यह रिपोर्ट कौशल विकास मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित है. मंत्रालय ने ये आंकड़े असीम (ASEEM आत्मनिर्भर स्किल्ड एम्पलॉई एम्पलॉयर मैपिंग) पोर्टल पर डाले हैं. आंकड़ों से पता चलता है कि 3.7 लाख कैंडिडेट्स में से मात्र 2 फीसदी लोगों को रोजगार मिल पाया.
ये भी पढ़ें: PMMY Loan Scheme: इस सरकारी योजना में मिल रहा 10 लाख का लोन, जानें क्या आप भी हैं हकदार
कुशल रोजगार की मांग
रिपोर्ट में यह भी पता चलता है कि 69 लाख प्रवासी श्रमिकों ने रोजगार के लिए अप्लाई किया जिनमें तकरीबन डेढ़ लाख श्रमिकों को रोजगार का प्रस्ताव दिया गया. लेकिन केवल 7700 श्रमिक ही काम से जुड़ पाए. सूत्रों ने 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा कि रोजगार पोर्टल लोगों को स्किल ट्रेनिंग देने में मदद के लिए शुरू किया गया था. पोर्टल पर जिन लोगों ने अप्लाई किया है, उनमें सभी प्रवासी श्रमिक नहीं हैं. पोर्टल पर जो लोग आए हैं उनमें स्वरोजगार प्राप्त टेलर, इलेक्ट्रीशियन, फील्ड टेक्निशियन, सिलाई मशीन ऑपरेटर और फीटर्स शामिल हैं. जबकि कूरियर डिलीवरी एक्जक्यूटिव, नर्स, अकाउंट एक्जक्यूटिव, मैनुअल क्लीनर और सेल्स एसोसिएट्स की मांग ज्यादा है.
यूपी-बिहार लौटे श्रमिक
पोर्टल के आंकड़ों से पता चलता है कि कर्नाटक, दिल्ली, हरियाणा, तेलंगाना और तमिलनाडु में श्रमिकों की घोर कमी है. ये वही प्रदेश हैं जहां से श्रमिकों की एक बड़ी आबादी अपने गांव-घर की ओर लौट गई. मार्च में लॉकडाउन शुरू होते ही यूपी और बिहार के ज्यादातर श्रमिक अपने गांव लौट गए. पोर्टल पर एक सप्ताह में रोजगार के लिए अप्लाई करने वालों की संख्या देखें तो उसमें 80 फीसदी तक का इजाफा दर्ज हुआ है. 14 से 21 अगस्त के बीच यह संख्या 2.97 लाख लोगों से बढ़कर 3.78 लाख तक पहुंच गई. दूसरी ओर जिन लोगों को रोजगार मिला उनके आंकड़े मात्र 9.87 फीसदी तक ही बढ़ पाए. ये आंकड़े भी एक हफ्ते के हैं. पहले 7009 लोगों को रोजगार मिला तो एक हफ्ते में यह बढ़कर 7700 हो गया. पोर्टल पर रजिस्टर कराने वाले लोगों की संख्या में 11.98 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. 61.67 फीसदी से बढ़कर यह संख्या 69 लाख पर पहुंच गई.