जजों की नियुक्ति पर केंद्र सरकार की तरफ से अहम जवाब आया है. इससे पता चला है कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के कई जज रिटायर हुए लेकिन नई नियुक्ति नहीं हुई. सर्वोच्च न्यायालय और देश के उच्च न्यायालयों में जजों के खाली पदों को भरने के सवाल पर सरकार ने साफ कहा कि जजों की नियुक्ति में सरकार की कोई भूमिका नहीं है. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम से आने वाली सिफारिशों की जांच पड़ताल के बाद सरकार जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर देती है. लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए विधि और न्याय मंत्री ने ये जानकारी दी है.
यह भी बताया गया कि जिला और सत्र न्यायलयों यानी निचली न्यायपालिका में भी जजों या न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में भी केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है.
पिछले साल एक भी सिफारिश नहीं!
सरकार ने अपने जवाब में ये भी कहा कि पिछले साल यानी 2020 में सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए कोलेजियम ने एक भी सिफारिश नहीं की. जबकि पिछले साल हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति और चीफ जस्टिस नियुक्त करने के लिए सिफारिशें आईं. इनमें से 66 जजों को नियुक्त किया गया. इसके बावजूद देश भर के 25 उच्च न्यायालयों में जजों की कुल स्वीकृत संख्या में से 454 जजों के पद रिक्त हैं. जबकि जिला और सत्र न्यायालयों में जजों के 5,132 पद रिक्त हैं.
केरल हाई कोर्ट में दस पद खाली
विधि और न्याय मंत्री किरण रिजिजू की ओर से लोकसभा में प्रश्न के लिखित जवाब में मंत्रालय ने जानकारी दी कि केरल उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 47 हैं लेकिन वहां अभी 37 ही जज हैं. इनमें से चार जज दूसरे उच्च न्यायालयों से तबादला होकर आए हुए हैं. इस तरह यहां जजों के दस पद खाली हैं. केरल की निचली अदालतों में भी न्यायिक अधिकारियों के 541 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 464 ही भरे हुए हैं. यहां भी 77 रिक्तियां हैं. राज्य की निचली अदालतों में कंप्यूटराइज्ड कोर्ट की संख्या 2014 में 13672 से बढ़ कर अब 18,735 हो गई हैं. सॉफ्टवेयर भी बढ़िया और आधुनिक होने से अब 18.77 करोड़ मुकदमों और उनमें 14 करोड़ 61 लाख आदेश और फैसले जनता ई कोर्ट्स के जरिए सीधे देख समझ पा रही है.
दिल्ली, फरीदाबाद, पुणे, नागपुर, कोच्चि, चेन्नई, गुवाहाटी और बेंगलुरु में ट्रैफिक नियमों के तहत होने वाले अपराधों के लिए 12 वर्चुअल कोर्ट बनाए गए हैं. इनमें से दो दिल्ली में हैं. इनके जरिए 12 जुलाई तक ऐसे अपराधों के 75 लाख मामले निपटाए गए और 160 करोड़ पांच लाख रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले गए.
जब से कोविड संकट और लॉक डाउन शुरू हुआ तब से जिला अदालतों में 74,15,989 मुकदमों की सुनवाई हुई जबकि हाईकोर्ट में 40,43,300 मुकदमे सुने गए. सुप्रीम कोर्ट में 96,239 मुकदमों की सुनवाई हुई.