नए कृषि कानून के खिलाफ सरकार और किसानों में ठन गई है. एक तरफ किसान कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं सरकार ने साफ कह दिया है कि नए कानून वापस नहीं होंगे. कृषि कानून को लेकर छिड़े विवाद के बीच देश का मिजाज यानी मूड ऑफ द नेशन (MOTN) क्या रहा, इसे जानने के लिए आजतक के लिए कार्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने सर्वे किया.
इस सर्व में 34 फीसदी लोगों ने माना कि नए कृषि कानून से किसानों को फायदा होगा. 32 फीसदी लोगों का कहना है कि इस कानून से कॉर्पोरेट घराने को लाभ होगा. 25 फीसदी लोगों ने माना कि दोनों के लिए फायदेमंद है, जबकि 8 फीसदी असमंजस में रहे. वहीं, 28 फीसदी लोगों का कहना है कि कृषि कानून वापस होना चाहिए. जबकि 55 फीसदी ने कृषि कानून में सुधार करने की वकालत की है.
बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा में केंद्र सरकार द्वारा कल बुधवार को रखे गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया. आम सभा में तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक एमएसपी के लिए एक कानून बनाने की बात किसान आंदोलन की मुख्य मांगों के रूप में दोहराई गई है.
मूड ऑफ द नेशन सर्वे
मूड ऑफ द नेशन पोल मार्केट रिसर्च एजेंसी कार्वी इनसाइट्स ने किया. लोगों की राय 3 जनवरी से 13 जनवरी, 2021 के बीच ली गई. सर्वे में कुल 12,232 लोगों को शामिल किया गया. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 67 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों के 33 प्रतिशत लोग थे. 19 राज्यों में 97 संसदीय क्षेत्र और 194 विधानसभा क्षेत्र में ये सर्वे किए गए.
लॉकडाउन ने किसका क्या बिगाड़ा?
सर्वे में एक सवाल लॉकडाउन के इम्पैक्ट को लेकर था. सर्वे में लोगों से पूछा गया कि लॉकडाउन का क्या असर हुआ? 39% ने कहा कि कोरोना संक्रमण का फैलाव रुका. 28 फीसदी लोगों ने कहा कि संक्रमण पर लगाम तो लगा, लेकिन दूसरी समस्याएं हुईं. 13 फीसदी ने माना लॉकडाउन का कोई असर नहीं हुआ. वहीं सर्वे में 10 फीसदी लोगों ने कहा कि लॉकडाउन का असर इकोनॉमी पर हुआ. 7 फीसदी ने कहा कि कोरोना का फैलाव कम हुआ, लेकिन इससे इकोनॉमी संकट में आ गई.