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Explainer: लाउडस्पीकर पर देशभर में संग्राम... अगर घर पर भी बजाते हैं तो जान लीजिए क्या हैं नियम, क्या है सजा का प्रावधान

Loudspeaker Rules: साल 2000 में बने नॉयज पॉल्यूशन रूल्स में लाउडस्पीकर और दूसरे वाद्य यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर नियम है. इन नियमों के मुताबिक, रिहायशी इलाकों में दिन के समय ध्वनि का स्तर 55 डेसीबल और रात के समय 45 डेसीबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए. अगर नियम तोड़ते हैं तो इसके लिए 5 साल कैद भी हो सकती है.

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लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की मनाही नहीं, लेकिन कुछ नियम जरूर हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की मनाही नहीं, लेकिन कुछ नियम जरूर हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर रोक
  • घर में 55 डेसीबल से ज्यादा नहीं हो सकती आवाज
  • इंसान के लिए 70 डेसीबल तक की आवाज सामान्य

Loudspeaker Rules: लाउडस्पीकर का 'शोर' अब देशभर में सुनाई देने लगा है. महाराष्ट्र से लेकर यूपी तक और राजस्थान से लेकर एमपी तक... लाउडस्पीकर को लेकर बवाल जारी है. महाराष्ट्र में राज ठाकरे मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर लगातार चेतावनी दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश में 54 हजार से ज्यादा मस्जिदों से लाउडस्पीकर को हटा लिया गया है और 60 हजार लाउडस्पीकर की आवाज कम कर दी गई है. मुंबई के वाशिम में भी कई मस्जिदों से लाउडस्पीकर को हटा दिया गया है और अब नमाज के लिए लोगों को घर-घर जाकर जगाया जा रहा है. 

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लाउडस्पीकर को लेकर विवाद नया नहीं है. कुछ साल पहले सिंगर सोनू निगम ने भी मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि सुबह-सुबह लाउडस्पीकर की तेज आवाज से नींद में खलल पड़ता है. 

देश में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर मनाही नहीं है, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर कुछ शर्तें भी रखी गईं हैं, ताकि इसका इस्तेमाल करते वक्त दूसरे के जीवन पर कोई असर न हो. लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर संविधान में नॉयज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 में प्रावधान है. 

नियम है कि किसी भी सार्वजनिक जगह पर लाउडस्पीकर या कोई भी वाद्य यंत्र बजाना है तो उसके लिए पहले इजाजत लेनी होगी. इतना ही नहीं, अगर आप अपने घर पर या रिहायशी इलाके में इनका इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो उसके लिए भी नियम हैं.

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क्या हैं घर पर लाउडस्पीकर के लिए नियम?

इसे समझने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि लाउडस्पीकर या किसी भी वाद्य यंत्र को कब से कब तक बजाने की इजाजत है. नियमों के मुताबिक, सुबह के 6 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक ही लाउडस्पीकर या वाद्य यंत्र बजाने की इजाजत है. अगर इसका इस्तेमाल सार्वजनिक जगहों पर कर रहे हैं तो प्रशासन से लिखित अनुमति लेनी जरूरी है. 

हालांकि, राज्य सरकार चाहे तो कुछ मौकों पर इसमें रियायत दे सकती है. सरकार किसी संगठन या धार्मिक कार्यक्रम के लिए लाउडस्पीकर या दूसरे यंत्रों को बजाने की अनुमति रात 10 बजे से बढ़ाकर 12 बजे तक कर सकती है. हालांकि, ऐसी अनुमति साल में सिर्फ 15 बार ही दी जा सकती है. 

नॉयज पॉल्यूशन रूल्स के अंतर्गत सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने चार अलग-अलग इलाकों के हिसाब से ध्वनि का मापदंड तय कर रखा है. इसके मुताबिक इंडस्ट्रियल, कमर्शियल, रेसिडेंशियल और साइलेंस जोन में कितनी आवाज रहेगी, इसका मापदंड तय है.

- इंडस्ट्रियलः यहां ध्वनि का स्तर दिन के समय 75 डेसीबल और रात के समय 70 डेसीबल तय है.

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- कमर्शियलः यहां पर दिन में 65 डेसीबल और रात में 55 डेसीबल तक की लिमिट है.

- रेसिडेंशियलः दिन के वक्त ध्वनि का स्तर 55 डेसीबल और रात के समय 45 डेसीबल की लिमिट है.

- साइलेंस जोनः दिन में 50 डेसीबल और रात में 40 डेसीबल का स्तर होगा.

नियमों के मुताबिक, साइलेंस जोन में लाउडस्पीकर या कोई भी तेज आवाज वाला यंत्र बजाने पर रोक नहीं है. साइलेंस जोन में अस्पताल, स्कूल और कोर्ट जैसी जगहें शामिल हैं. हालांकि, अनुमति और शर्तों के साथ बजा सकते हैं. वहीं, दिन का समय यानी सुबह के 6 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक और रात का समय यानी रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक. 

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मेरा घर है, मैं कुछ भी करूं...

माना कि आपका अपना घर है और आपको अपने घर में कुछ भी करने का अधिकार है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप अपने घर में तेज आवाज में लाउडस्पीकर या कोई भी तेज आवाज करने वाला यंत्र बजाएं. 

नियमों के मुताबिक, रिहायशी इलाकों में लाउडस्पीकर या कोई भी तेज आवाज के यंत्र की ध्वनि का स्तर दिन में 55 डेसीबल और रात में 45 डेसीबल से ज्यादा नहीं होगा. अगर ऐसा होता है तो नियमों के उल्लंघन पर आपको कैद और जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. इन नियमों को तोड़ने पर 5 साल कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. 

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इतना ही नहीं, संविधान का अनुच्छेद 19 (1) (A) और अनुच्छेद 21 हर नागरिक को बेहतर वातावरण और शांति से जीवन जीने का अधिकार देता है. 1992 में पीए जैकब बनाम कोट्टायम एसपी के मामले में केरल हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि अनुच्छेद 19 (1) के तहत मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी व्यक्ति को तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने की इजाजत नहीं देता है. 

55 डेसीबल का मतलब क्या?

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन डेफनेस एंड अदर कम्युनिकेशन डिसऑर्डर के मुताबिक, इंसान के कान के लिए 70 डेसीबल तक की आवाज सामान्य है. वहीं, भारत के पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने इसकी लिमिट 65 डेसीबल तय कर रखी है. यानी, इतनी तेज आवाज से कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन अगर इससे ज्यादा तेज आवाज है तो नुकसान हो सकता है. 

55 डेसीबल कितना होता है, इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि जब दो लोग आपस में बातचीत करते हैं तो उस आवाज का लेवल 60 डेसीबल होता है. इंसान के सांस की आवाज भी 10 डेसीबल के आसपास होती है. पिन के गिरने से भी 10 डेसीबल की आवाज निकलती है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि अगर आवाज का स्तर 70 डेसीबल से कम है तो ये ठीक है, लेकिन अगर कोई 80 डेसीबल से ज्यादा की आवाज में 8 घंटे से ज्यादा रहता है तो ये खतरनाक हो सकता है. ज्यादा तेज आवाज सुनने से हियरिंग लॉस होने का खतरा भी है. WHO के मुताबिक, आने वाले समय में 1.1 अरब लोगों में हियरिंग लॉस का खतरा है और उसकी वजह पर्सनल ऑडियो डिवाइस होगी.

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