मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री पद के लिए मोहन यादव के नाम का ऐलान कर दिया गया है. वह उज्जैन दक्षिण सीट से तीन बार के विधायक रहे हैं. और मूल रूप से उज्जैन के ही रहने वाले हैं. लेकिन इस बीच उज्जैन नगरी को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है.
इस बहस की शुरुआत कांग्रेस ने की है. मध्य प्रदेश कांग्रेस की मीडिया विंग के चेयरमैन केके मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि मध्य प्रदेश के नवघोषित मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को बधाई और शुभकामनाएं. क्या कोई सनातनी यह बताएगा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में अब दो राजा कैसे रहेंगे?
बाबा महाकाल से बड़ा शासक नहीं?
एक मान्यता है कि उज्जैन के राजा भगवान महाकालेश्वर यानी बाबा महाकाल हैं. इनसे बड़ा शासक कोई नहीं है. किंवदंति के मुताबिक कोई भी राजा उज्जैन में रात में ठहरता नहीं है. इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि एक शहर में दो राजा नहीं ठहर सकते हैं. अगर कोई भी राजा, मंत्री या नेता यहां रात में ठहरता है, तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है.
दशकों पुरानी है परंपरा
यह परंपरा पुरानी नहीं बल्कि अति पुरानी है. एक समय में अवंतिका नगरी में राजा विक्रमादित्य की यह राजधानी हुआ करती थी. राजा भोज के समय से ही उज्जैन में कोई रात में नहीं रुकता था. इस मंदिर का निर्माण 1736 में हुआ है. इस परंपरा का पालन उसी समय से होता आ रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बाबा महाकाल मंदिर के पंडित महेश पुजारी बताते हैं कि बाबा महाकाल की अपनी एक परिधि है. यहां कोई भी राज घराने का राजा या मुख्यमंत्री रात में ठहरता नहीं है.
कई नेता भुगत चुके हैं खामियाजा
कहा जाता है कि जो भी नेता या मंत्री बाबा महाकाल के दरबार में रात में ठङरता है तो उनकी कुर्सी छिन जाती है. कहा जाता है कि देश के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई एक रात उज्जैन में ठहरे थे. लेकिन अगले ही दिन उनकी सरकार गिर गई थी. कर्नाटक के मुख्मंत्री येदियुरप्पा भी उज्जैन में रात में ठहरे थे, जिसेक बीस दिन बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.