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शिवराज मामा की छुट्टी करने वाले मोहन यादव कौन हैं?

MP के अगले मुख्यमंत्री को किस आधार पर चुना गया है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ क्या खत्म हो जाएगी आर्टिकल 370 के पीछे चलने वाली राजनीति, FBI डायरेक्टर के भारत दौरे का एजेंडा क्या है, सुनिए 'दिन भर' में.

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DIN BHAR
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शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र सिंह तोमर जैसे तमाम दिग्गज़ों को साइड करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला किया है. सुबह से विधायक दल की बैठक चल रही थी. राज्य के पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बताया कि शिवराज सिंह चौहान ने ही मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिसका समर्थन सबने किया. इसके बाद मोहन यादव ने भी मीडिया से बात की और पार्टी के सभी नेताओं का धन्यवाद दिया और कहा ऐसा सिर्फ़ बीजेपी में ही सकता है. इसके साथ ही जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला को डिप्टी सीएम बनाया गया है. नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा गया है. ये सभी नाम दूर दूर तक चर्चा में नहीं थे, आज अचानक से मोहन यादव फ़ोटो सेशन में भी पीछे खड़े थे, अब सेंटर में आ चुके हैं, ये कैसे हुआ, कितना चौंकाने वाला रहा,  सुनिए 'दिन भर' में.

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जैसा कि हमने आपको अपने सुबह के पॉडकास्ट आज के दिन में बताया था कि आज सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 पर फ़ैसला सुनाएगी. सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से अपना फ़ैसला सुनाया और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने का फ़ैसला बरकरार रखा है. CGI ने कहा कि राष्ट्रपति शासन के दौरान लिए गए केंद्र के फ़ैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती है. अनुच्छेद 370 युद्ध जैसी स्थिति में एक अंतरिम प्रावधान था. इसके टेक्स्ट को देखें तो भी पता चलता है कि यह अस्थायी प्रावधान यानी टेम्पररी अरेंजमेंट था. कोर्ट के फ़ैसले के बाद पॉलिटिकल रिएक्शन भी आने शुरू हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कोर्ट के फ़ैसले को एतिहासिक बताया. वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूब मुफ़्ती इसे बस एक पड़ाव मानती हैं. इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के साथी उद्धव ठाकरे वाली शिव सेना ने भी कोर्ट के फ़ैसले पर खुशी जताई है और उसका समर्थन किया है. वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी आर्टिकल 370 हटाने के पक्ष में थी, उनकी आपत्ति सरकार के तरीके से रही है. दोनों ओर से लंबी बहसें हुईं, बारी-बारी से सभी पक्षों ने अपने तर्क रखे लेकिन सरकार की ओर से ऐसी क्या दलीलें रखी गईं, जिसकी वजह से फ़ैसला उनकी पक्ष में गया,  सुनिए 'दिन भर' में.

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अमेरिका की खुफिया सुरक्षा एजेंसी FBI के डायरेक्टर क्रिस्टोफर ए रे भारत आए हैं. इससे पहले किसी FBI डायरेक्टर साल 2011 में भारत की धरती पर कदम रखा था. क्रिस्टोफर आज और कल दिल्ली में NIA और CBI के अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं.  
FBI डायरेक्टर का ये दौरा बेहद अहम माना जा रहा है और इसे आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश से जोड़ कर देखा जा रहा है. अमेरिका ये दावा कर चुका है कि भारतीय नागरिक ने ही आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची थी. साथ ही भारत सरकार के किसी अधिकारी के शामिल होने का आरोप भी लगाया था.पन्नू ने खुद भी भारत पर हत्या की साजिश रचने के आरोप लगाए थे. अमेरिका ने भी भारत पर यही आरोप लगाए, तो भारत सरकार ने इस पर तुरंत प्रभाव से एक्शन लेते हुए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया, जिसकी अमेरिका ने भी सराहना की थी. फिर 12 साल बाद FBI के डायरेक्टर क्यों भारत आए हैं, एजेंडा क्या है, सुनिए 'दिन भर' में. 

 

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