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MUDA स्कैम की जांच में शामिल रिटायर्ड जस्टिस PN देसाई पर लगा बैन, आयोग के लिए नहीं कर सकेंगे काम

पीएन देसाई के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत में उनकी अध्यक्षता को तत्काल रद्द करने और उनके पास मौजूद MUDA से संबंधित सभी दस्तावेजों को वापस लेने की मांग की गई है. केंद्र सरकार ने देसाई को सभी जांच गतिविधियों को बंद करने का भी निर्देश दिया है.

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MUDA स्कैम (फाइल फोटो)
MUDA स्कैम (फाइल फोटो)

MUDA घोटाला जांच आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज जस्टिस पीएन देसाई को केंद्र सरकार ने तीन साल के लिए बैन कर दिया है. 7 नवंबर, 2024 को जारी यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें देसाई को किसी भी स्वायत्त, विधायी या नियामक आयोग में काम करने से प्रतिबंधित किया गया है.

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केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में पहले नियुक्त किए गए जस्टिस देसाई ने इस पद को लेने से मना कर दिया था, जिसके कारण मौजूदा नियमों के तहत उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था.

स्नेहमयी कृष्णा द्वारा की गई शिकायत में देसाई की अध्यक्षता को तत्काल रद्द करने और उनके पास मौजूद MUDA से संबंधित सभी दस्तावेजों को वापस लेने की मांग की गई है. केंद्र सरकार ने देसाई को सभी जांच गतिविधियों को बंद करने का भी निर्देश दिया है.

शिकायतकर्ता ने लगाया धमकी मिलने का आरोप

स्नेहमयी कृष्णा की ही शिकायत पर मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) साइट आवंटन घोटाले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. हाल ही में कृष्णा ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकाया गया और मामले को निपटाने के लिए वित्तीय प्रलोभन दिया गया. कृष्णा के मुताबिक, ये मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा धमकाने की रणनीति थी और उन्होंने पार्वती के कथित सहयोगी हर्ष और एक स्थानीय पत्रकार श्रीनिधि पर समझौता कराने का प्रयास करने का आरोप लगाया.

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जांच की मांग करते हुए कृष्णा ने कहा कि उन्होंने धमकी के अपने आरोपों का समर्थन करने के लिए सीसीटीवी फुटेज सहित सबूत भी दिए हैं.

कर्नाटक लोकायुक्त, मैसूर डिवीजन के पुलिस अधीक्षक को लिखे अपने तीन पन्नों के शिकायत पत्र में उन्होंने बताया कि कैसे हर्षन और श्रीनिधि ने पहले उनसे और फिर उनके बेटे से उनके घर पर संपर्क किया और उन्हें मामले को सुलझाने के लिए मजबूर किया. 

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