साध्वी के साथ रेप और पत्रकार छत्रपति हत्या मामले में सजा काट रहा बाबा गुरमीत राम रहीम (Ram Rahim) एक बार फिर सलाखों के पीछे जाने वाला है. राम रहीम, पैरोल पर जेल से बाहर है, जो आज यानी रविवार को खत्म हो रही है. उसे एक बार फिर से कड़ी सुरक्षा में रोहतक की सुनारिया जेल में बंद किया जाएगा. राम रहीम शाम करीब 5 बजे रोहतक जेल आएगा.
राम रहीम को जेल प्रशासन ने 19 फरवरी को 50 दिन की पैरोल दी थी. बता दें कि जब भी राम रहीम को पैरोल या फरलो दी जाती है, जेल प्रशासन और सरकार पर उठते हैं. राम रहीम की पैरोल को लेकर इस बार हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब भी मांगा था.
राम रहीम को कब-कब मिली पैरोल?
देश का पहला और इकलौता मामला
क्या आप यकीन करेंगे कि अपने जेल जाने के बाद पिछले दो सालों में राम रहीम कुल 184 दिन यानी तकरीबन छह महीने पैरोल और फर्लो के तौर पर जेल के बाहर मौज काट चुका है. और अगर इन 184 दिनों में आखिरी के 50 दिनों के पैरोल को और जोड़ दिया जाए, तो ये आंकड़ा सीधे 234 दिन का बनता है, जो सात महीने से भी ज्यादा है. इतनी जल्दी-जल्दी और इतना ज्यादा पैरोल मिलने का ये शायद देश का पहला और इकलौता मामला है.
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हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती
अब जब कुछ कैदियों को पैरोल ही ना मिले और किसी को मिले तो इतनी मिले कि उसकी गिनती ही खत्म ना तो, तो फिर बवाल मचना तो लाजिमी है. एसजीपीसी के याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार से ये भी पूछ लिया है कि उसने और कितने कैदियों को इस तरह पैरोल पर रिहा किया है, सरकार उसकी भी लिस्ट कोर्ट के हवाले करे.
11 मार्च को होगी अगली सुनवाई
राम रहीम पर लगी पैरोल की झड़ी को लेकर कोर्ट कितना नाराज है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोर्ट ने ये कहा है कि 'हम चाहते हैं कि हरियाणा सरकार एक हलफनामा प्रस्तुत करे कि ऐसे आपराधिक इतिहास वाले और 3 मामलों में सजा पाने वाले कितने अपराधियों को यह लाभ दिया गया है? इस मामले में अगली सुनवाई अब 11 मार्च को होगी.
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राम रहीम को मिली है उम्रकैद की डबल सजा
राम रहीम कोई मामूली कैदी नहीं है. उसे दो-दो बलात्कार और दो-दो कत्ल के मामलों में 20 साल की कैद से लेकर उम्र कैद तक की डबल सजा मिल चुकी है. इस बार जब तक वो अपनी पैरोल पूरी कर अदालत मे आत्मसमर्पण करेगा, तब तक वो सजायाफ्ता मुजरिम होने के बावजूद करीब सात महीने की आजादी के मजे ले चुका होगा. अपने आश्रमों में बैठ ना सिर्फ सारे जरूरी काम-काज इत्मीनान से निपटा चुका होगा, बल्कि बीच-बीच में अपनी गद्दी से समर्थकों को ज्ञान की घुट्टी भी पिला चुका होगा.