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हिंदू बुजुर्ग का मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया अंतिम संस्कार, पेश की इंसानियत की मिसाल

हिंदू व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार रीति-रिवाजों के साथ गांव के मुसलमानों ने किया. इतना ही नहीं, गांव के हिंदू परिवार की देखभाल भी मुस्लिम समुदाय करता है. मृतक की बेटी ने बताया कि ग्रामीण हर परिस्थिति में उनके साथ रहते हैं. इस मुस्लिम बहुल गांव में सिर्फ उनका ही एक हिंदू परिवार है. 

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हिंदू बुजुर्ग के अंतिम संस्कार की तैयारी करते मुस्लिम समुदाय के लोग.
हिंदू बुजुर्ग के अंतिम संस्कार की तैयारी करते मुस्लिम समुदाय के लोग.

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले से सामाजिक सौहार्द की एक मिसाल देश के सामने पेश हुई है. यहां के मुस्लिम बहुल गांव में सिर्फ एक हिंदू परिवार रहता है. हिंदू व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के साथ गांव के मुसलमानों ने किया. इतना ही नहीं, एक हादसे के बाद पिता का एक पैर कट गया था. लिहाजा, वह उस तरह काम नहीं कर सकते थे.

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पड़ोसी मुस्लिम समुदाय के लोग उनके पिता से प्यार करते थे. इसी वजह से गांव के हिंदू परिवार की देखभाल भी मुस्लिम समुदाय करता था. मृतक की बेटी ने बताया कि ग्रामीण हर परिस्थिति में उनके साथ रहते हैं. पिता के निधन के बाद घर में तीन बहनें बची हैं. मानवता की ऐसी ही बानगी गुरुवार को पूर्व बर्धमान के पाटुली के दमपाल घाट पर देखने को मिली.

कटवा थाना अंतर्गत सिंगी पंचायत के शिमुलगाछी गांव के एकमात्र हिंदू बुजुर्ग गणेश हाजरा की मौत के बाद शिमुलगाछी के मुस्लिम ग्रामीणों ने उनके शव का अंतिम संस्कार किया. गांव में एक हिंदू परिवार को छोड़ बाकी मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं. मृतक की बेटी चुमकी हाजरा ने कहा कि ये ग्रामीण हर परिस्थिति में उनके साथ रहते हैं.

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4 पीढ़ियों से गांव में रह रहा परिवार 

इस मुस्लिम बहुल गांव में उनका ही एक मात्र हिंदू परिवार है. पड़ोसी मुस्लिम समुदाय के लोग उनके पिता से प्यार करते हैं. वो लोग उनके परिवार की देखभाल करते थे और पिता को खाना खिलाते थे. गांव के लोग बहुत अच्छे हैं. पिता इन लोगों के कारण ही इतने लंबे समय तक जीवित रहे. ग्रामीण सैदुल इस्लाम मल्लिक और मिराज देख ने बताया कि गांव में 4 से 5 हजार लोग रहते हैं. इनमें एक ही हिंदू परिवार है, हाजरा परिवार. वे यहां 4 पीढ़ी से रह रहे हैं. 

बहुत गरीब था हजारा का परिवार 

गणेश हाजरा की भाभी दाई का काम और बच्चों की देखभाल का काम करती थीं. गणेश का एक बेटा है, लेकिन वह कहीं चला गया है. तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है. हादसे में गणेश हाजरा ने अपना एक पैर खो दिया था, तब से वह काम नहीं कर पा रहे थे. परिवार बहुत गरीब था. इसलिए ग्रामीणों ने मिलकर आज उसके शव का अंतिम संस्कार किया है.

दिल का दौरा पड़ने से हुई थी मौत 

गणेश हाजरा की गुरुवार दोपहर दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी. मुस्लिम समुदाय के लोग उनकी बेटियों के पास आए. उन्होंने लड़कियों के साथ मिलकर गुरुवार की रात गांव से 12 किमी दूर पूर्वस्थली के पाटुली डंपल श्मशान घाट पर गणेश हाजरा का अंतिम संस्कार किया.

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