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महापंचायतः किसानों का 'जोश हाई', सड़कों पर भीड़, टिकैत की पत्नी ने भी किया स्वागत

मुजफ्फरनगर में रविवार को किसानों की महापंचायत हो रही है. इस पंचायत में 300 से ज्यादा किसान संगठनों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. किसान नेता राकेश टिकैत भी इसमें शामिल होने के लिए गाजीपुर से मुजफ्फरनगर पहुंचे. इस दौरान मुजफ्फरनगर पहुंचते ही उनकी पत्नी भी चलती गाड़ी में चढ़ गई और नारे लगानी लगीं.

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राकेश टिकैत की पत्नी सुनीता.
राकेश टिकैत की पत्नी सुनीता.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुजफ्फरनगर में हो रही महापंचायत
  • सैकड़ों किसान संगठन हुए शामिल
  • राकेश टिकैत भी पहुंचे मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर में रविवार को किसानों की महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) हो रही है. इस महापंचायत में 300 से ज्यादा किसान संगठनों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. संयुक्त किसान मोर्चा ने तो ये दावा भी किया है कि ये किसानों की अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत है. इस महापंचायत में शामिल होने के लिए किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) भी पहुंचे. 

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राकेश टिकैत रविवार सुबह गाजीपुर से अपने घर से निकले. दोपहर करीब साढ़े 11 के आसपास उनका काफिला मुजफ्फरनगर पहुंचा. इस दौरान सड़क की दोनों ओर उनके स्वागत के लिए सैकड़ों लोग जुटे थे, जो नारेबाजी कर रहे थे. टिकैत भी गाड़ी पर खड़े होकर उनका अभिवादन कर रहे थे.

इस दौरान राकेश टिकैत की पत्नी सुनीता टिकैत भी चलती गाड़ी में खड़ी हो गईं और नारेबाजी करने लगीं. टिकैत के समर्थक 'जिंदाबाद' के नारे लगा रहे थे और उनकी पत्नी भी हाथ उठा-उठाकर उत्साह बढ़ा रही थीं. 

टिकैत के स्वागत में उमड़ी भीड़

राकेश टिकैत के स्वागत में मुजफ्फरगनर की सड़कों पर सैकड़ों की भीड़ इकट्ठी हुई. जिस सड़क से उनका काफिला गुजर रहा था, उसके दोनों तरफ लोग खड़े हुए थे और फूलों से और नारे से उनका स्वागत कर रहे थे. राकेश टिकैत भी गाड़ी पर खड़े होकर हाथ हिलाकर और हाथ जोड़कर उनका अभिवादन कर रहे थे. 

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जीआईसी मैदान पहुंचने के बाद जब राकेश टिकैत से जब पूछा गया कि क्या इस तरह के स्वागत के उम्मीद थी, तो उन्होंने कहा कि ये बड़ा ही क्रांतिकारी क्षेत्र है. ये स्वागत करता है. उन्होंने ये भी माना कि अब उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है. 

10 महीने बाद मुजफ्फरनगर आए राकेश टिकैत

राकेश टिकैत 10 महीने बाद मुजफ्फरनगर पहुंचे. टिकैत मुजफ्फरनगर के ही रहने वाले हैं और जब से किसान आंदोलन (Farmer Protest) शुरू हुआ है, तब से उन्होंने यहां कदम नहीं रखा है. टिकैत ने बताया, 'जब से आंदोलन शुरू हुआ है तब से मैं पहली बार मुजफ्फरनगर जा रहा हूं और वो भी गलियारे से जाऊंगा. वहां की जमीन पर कदम भी नहीं रखूंगा और अपने घर की तरफ देख लूंगा, वहां के लोगों को देख लूंगा.'

उन्होंने कहा, 'इसे आप जो भी समझे लेकिन जब तक कानून वापसी नहीं तब तक घर वापसी नहीं. जो लोग आजादी की लड़ाई के लिए लड़े, उन्हें काला पानी की सजा हुई तो वो कभी घर गए ही नहीं गए. ये भी एक तरीके का काला कानून है और जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक घर नहीं जाएंगे.'

 

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