जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (Jagannath temple Ratna Bhandar) के भीतर का तिलिस्म क्या है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इसे जानने की कोशिश में लगा है. खजाने के तहखाने में गुप्त सुरंग या कक्ष की मौजूदगी का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. इस ऐतिहासिक मंदिर के खजाने में क्या कोई छुपी हुई सुरंग है, इस सवाल का जवाब अब लेजर स्कैनिंग और रडार की मदद से खोजा जा रहा है.
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने ये सर्वे दूसरी बार शनिवार से शुरू किया है, जो 23 सितंबर तक चलेगा. इस दौरान श्रद्धालुओं को दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक मंदिर में प्रवेश और दर्शन से रोक दिया गया. एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद ने श्रद्धालुओं से इस प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है.
सीनियर अफसरों की निगरानी में किया जा रहा सर्वे
रत्न भंडार इन्वेंट्री समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ इस सर्वेक्षण का हिस्सा हैं. उन्होंने बताया कि 21 से 23 सितंबर तक एएसआई की टीम यह जांच करेगी कि रत्न भंडार के अंदर कोई गुप्त सुरंग या कक्ष है या नहीं. इसके लिए लेजर स्कैनिंग और रडार जैसी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है.
18 सितंबर को एएसआई की 17-सदस्यीय टीम ने रत्न भंडार का प्रारंभिक निरीक्षण किया था. इसमें वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें से कई सीएसआईआर और हैदराबाद के राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) से जुड़े हैं.
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मंदिर प्रशासन ने रत्न भंडार को खोलने के बाद सभी कीमती आभूषणों और सामान को सुरक्षित कक्ष में स्थानांतरित कर दिया था. राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत सभी कार्य किए जा रहे हैं. यहां दूसरी बार सर्वे को लेकर एसजेटीए ने एएसआई से अनुरोध किया है कि 24 सितंबर से शुरू हो रहे दुर्गा पूजा और दशहरा के विशेष अनुष्ठानों को ध्यान में रखते हुए सर्वेक्षण को उसी तारीख तक पूरा किया जाए.
कई स्थानीय निवासियों का मानना है कि रत्न भंडार के भीतरी कक्ष में गुप्त सुरंग मौजूद हो सकती है. मंदिर से जुड़े दिव्य सिंह देब ने कहा था कि एएसआई द्वारा की जा रही लेजर स्कैनिंग से किसी भी प्रकार की गुप्त संरचना का पता लगाया जा सकता है.
46 साल बाद खोला गया मंदिर का खजाना
भगवान जगन्नाथ मंदिर के खजाने को बीते जुलाई महीने में 46 साल बाद दोबारा खोला गया. इस खजाने में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के बेशकीमती आभूषण और दुर्लभ रत्नों का संग्रह है. पिछली बार 1978 में खजाने को खोला गया था, जब जौहरियों को बुलाया गया था, लेकिन वे भी रत्नों की कुल कीमत का अंदाजा लगाने में असमर्थ रहे थे.