
नगालैंड आज बंद है. शनिवार शाम को 14 नागरिकों की फायरिंग में मौत के विरोध में अलग-अलग संगठनों ने ये बंद बुलाया है. इसे देखते हुए नगालैंड प्रशासन ने मोन जिले में कर्फ्यू लागू कर दिया है. आज नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे. इस घटना में अब तक एक जवान समेत 15 लोगों की मौत हो चुकी है. इस घटना के बाद कई संगठनों ने नगालैंड में लागू AFSPA (Armed Forces Special Powers Act) को तत्काल वापस लेने की मांग की है.
नगालैंड में 4 दिसंबर की शाम को हुआ क्या था?
ये घटना नगालैंड के मोन जिले की है. यहां पर तिरु और ओटिंग गांव के कुछ लोग खदानों में काम करने गए थे. अमूमन शाम तक ये लोग काम से वापस लौट आते थे. शनिवार शाम तक यहां काम करने गए 6 युवक कोयला खदान से वापस नहीं लौटे तो गांव के वॉलंटियर्स और उनके परिजन उन्हें खोजने निकले. तभी उन्होंने देखा कि ओटिंग में ही एक पिकअप वैन में 6 युवकों के शव लथपथ पड़े हैं.
इन शवों को देखकर स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया. पहले तो इन्हें समझ में ही नहीं आया कि हुआ क्या है. बाद में इन्हें पता चला कि यहां पर सुरक्षा बलों ने फायरिंग की थी. ये घटना आग की तरह चारों ओर फैल हो गई. इसके बाद वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए. देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई. गुस्से में इन लोगों ने सुरक्षा बलों की गाड़ियों में आग लगा दी. सुरक्षा बलों ने भीड़ को समझाने की कोशिश की लेकिन उग्र भीड़ शांत नहीं हो रही थी. इस दौरान दोबारा फायरिंग हुई जिसमें कुछ और लोगों की जान चली गई.
नगालैंड के परिवहन मंत्री पाइवांग कोनयाक ने कहा कि शनिवार शाम को 13 नागरिक की मौत हुई जबकि रविवार को एक व्यक्ति की मौत हुई. ये घटना मोन शहर के तिरु और ओटिंग गांव में के बीच हुई.
3 लोग एयरलिफ्ट कर लाए गए दीमापुर
परिवहन मंत्री पाइवांग कोनयाक के अनुसार इस घटना में दो गंभीर रूप से घायल लोगों को डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया. जबकि 3 लोगों को एयरलिफ्ट कर दीमापुर लाया गया.
गलत पहचान का मामला
रिपोर्ट के अनुसार फायरिंग की पहली घटना जिसमें 6 लोगों की मौत हुई तब घटी जब सेना ने कोयला खदान में काम करने जा रहे मजदूरों को नगा उग्रवादी समझ लिया. ये लोग शनिवार शाम को पिक अप वैन से लौट रहे थे. सेना को लगा कि ये लोग प्रतिबंधित संगठन NSCN (K) के Yung Aung फैक्शन से जुड़े हैं. दरअसल सेना को इस फैक्शन के मूवमेंट की जानकारी मिली थी. बता दें कि मोन जिले की सीमाएं म्यांमार से मिलती है. उग्रवादी संगठन NSCN (K) यहीं से ऑपरेट करता है.
कैसे मारे गए 14 लोग और सेना का एक जवान
जब शाम को ये 6 लोग वापस नहीं लौटे तो स्थानीय युवा इनकी खोज करने निकले. इस दौरान एक पिकअप वैन में इन्हें 6 लोगों की डेड बॉडी मिली. इस दौरान एक जवान की मौत हो गई. इसके बाद सेना ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाई. इस फायरिंग में 7 और नागरिकों की मौत हो गई.
सेना का क्या है बयान
सेना के प्रवक्ता (कोहिमा) लेफ्टिनेंट कर्नल सुमित के शर्मा ने कहा कि उग्रवादियों की गतिविधियों की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सेना ने तिरु इलाके में एक ऑपरेशन प्लान किया था. इसी दौरान ये घटना हुई है. और इस घटना का उन्हें बेहद दुख है." नगालैंड के एक आदिवासी संगठन ने दावा किया है कि इस फायरिंग में 17 नागरिकों की मौत हुई है. लेकिन पुलिस 14 लोगों की मौत की ही बात कह रही है.
जांच के लिए SIT गठित
नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियो रियू ने इस घटना पर गहरा दुख जताया. उन्होंने घटना की जांच के लिए एक SIT गठित की है. सीएम ने वादा किया है कि ये SIT घटना की विस्तार से जांच करेगी और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दी जाएगी. इसके अलावा सीएम ने घटना में मारे गए लोगों को 5-5 लाख का मुआवजा भी दिया है.
आज नगालैंड बंद का ऐलान
इस घटना के विरोध में आज नगालैंड में संपूर्ण लॉकडाउन है. नगालैंड के छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों ने केंद्र और राज्य सरकार से AFSPA हटाने की मांग की है. नगालैंड के सर्वाधिक प्रभावशाली संगठन नगा मदर्स एसोसिएशन ने कहा है कि नगालैंड में सेना AFSPA का लगातार उल्लंघन कर रही है. मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है. वक्त आ गया है कि नगालैंड से AFSPA को हटाया जाए.
लोथा छात्र संगठन नाम की संस्था ने कहा कि अब सही वक्त आ गया है कि केंद्र सरकार नगा लोगों की पुकार को सुने और AFSPA को वापस ले. इसके अलावा Pochury Students Union, Kuki Inpi Nagaland और Khasi Students Union ने भी AFSPA वापस लेने की मांग की है. बता दें कि आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट नगालैंड में कई दशकों से लागू है. सन 1958 में संसद ने 'अफस्पा ' यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट लागू किया था. इसके तहत सैन्य बलों को विशेष अधिकार हासिल होता है. इस कानून के तहत सेना के जवानों को कानून तोड़ने वाले व्यक्ति पर गोली चलाने का भी अधिकार होता है. इस कानून को असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम और नगालैंड सहित समस्त पूर्वोत्तर भारत में लागू किया गया था.