
नगालैंड (Nagaland) में बीते शनिवार को फायरिंग में एक जवान समेत 15 लोगों की मौत के बाद से बवाल मचा हुआ है. आज इन्हीं मृतकों के अंतिम संस्कार के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो (Neiphiu Rio) ने प्रदेश से अफस्पा (AFSPA) कानून हटाने की मांग की है. उन्होंने इसे ड्रैकोनियन एक्ट बताया है. रियो ने कहा है कि उग्रवाद से निपटने के लिए इसे लागू किया गया था, फिर इसे अब क्यों नहीं हटाया जाता?
बता दें कि इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष पूरी तरह से केंद्र पर टूट पड़ा है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर ट्वीट किया है. उन्होंने कहा है कि यह घटना दिल दुखाने वाली है. भारत सरकार को इसपर जवाब देना चाहिए. जब हमारी ही भूमि पर न तो नागरिक और न ही सुरक्षाकर्मी सुरक्षित हैं तो गृह मंत्रालय वास्तव में क्या कर रहा है?
क्या है AFSPA?
आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट, 1958 (AFSPA) कानून के तहत केंद्र सरकार राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर किसी राज्य या क्षेत्र को अशांत घोषित कर वहां केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करती है. AFSPA के तहत सशस्त्र बलों को कहीं भी अभियान चलाने और बिना पूर्व वारंट के किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार प्राप्त है. नगालैंड में ये कानून लागू है.
क्या हुआ था नगालैंड में?
बता दें कि नगालैंड के मोन जिले में शनिवार शाम हुई गोलीबारी की घटना में एक जवान समेत 15 लोगों की मौत हो गई है. कथित तौर पर यहां 6 लोगों की मौत के बाद ग्रामीण सुरक्षाबलों से भिड़ गए थे. इसी पर सुरक्षाबलों की जवाबी कार्यवाही में अधिक लोग मारे गए. इसको लेकर असम राइफल्स ने कहा है कि- 'विद्रोहियों के संभावित मूवमेंट की विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिलने पर विशिष्ट अभियान चलाने की योजना बनाई गई थी. घटना और उसके बाद के परिणामों पर हमें खेद है. दुर्घटना में हुई मौतों के कारणों की उच्च स्तर पर जांच की जा रही है और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी.'