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भारत के कुछ प्राचीन मंदिरों के बारे में धारणाएं फैली हैं कि वहां हीरे-जवाहरात का बड़ा खजाना मौजूद हो सकता है. ऐसे में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से एक ऐसे बड़े गिरोह का पता चला है जो मंदिरों के ऐसे ही कथित खजाने पर हाथ साफ करने की फिराक में रहता है. गिरोह के सदस्य मंदिरों में सेंध लगाने का मौका ढूंढते रहते हैं.
आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले की पुलिस ने गिरोह के 7 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन्होंने हीरे-जवाहरात पाने की लालसा में नंदी की एक प्राचीन प्रतिमा को खंडित कर दिया. ये घटना नंदीग्मा वत्सावाई मंडल में हुई. नंदी की प्रतिमा कोट्टापेटा शिव मंदिर में स्थित थी.
बता दें कि आंध्र प्रदेश में मंदिरों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आने पर राज्य सरकार ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था. इसी SIT और कृष्णा जिले के एसपी रविंद्र बाबू ने गिरोह के पकड़े जाने की जानकारी दी और आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया.
एसपी रविंद्र बाबू ने बताया, “नंदी की प्रतिमा के पीछे हंस का प्रतीक बना हुआ था. ऐसे में सात आरोपियों का ‘यकीन’ और पक्का हो गया कि प्रतिमा के अंदर खजाना छुपा हुआ है, और उन्होंने इस अंधविश्वास के चक्कर में ये अपराध कर डाला.”
एसपी के मुताबिक खजाने की तलाश में रहने वाले गिरोह का मानना है कि नंदी, विनायक और मंदिर के शीर्ष पर उकेरे हुए कमल के अंदर सोना, हीरे, और अन्य मूल्यवान वस्तुएं रखी हुई हैं. इसलिए वो इन्हें निशाना बनाने की कोशिश करते रहते हैं.
पुलिस का कहना है कि उसने ऐसे 80 से 90 लोगों की पहचान की है जो दोनों तेलुगुभाषी राज्यों, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, में इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं.