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नारायण मूर्ति ने रतन टाटा से कौन सी अच्छी बात सीखी? इंफोसिस फाउंडर ने ऐसे किया याद

नारायण मूर्ति ने कहा कि मैंने एक बार उन्हें (रतन टाटा को) अक्षय पात्र रसोई का उद्घाटन करने के लिए इन्वाइट किया था, जिसकी फंडिंग मेरी पत्नी सुधा ने की थी. रतन टाटा कर्नाटक के हुबली आए, वहां करीब दो-ढाई दिन तक रहे और उन्होंने हर समारोह में भाग लिया. हुबली में रहने के दौरान रतन टाटा ने खुद को पूरी तरह से समारोह में डुबो लिया और युवाओं सहित सभी से बातचीत की.

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नारायण मूर्ति ने रतन टाटा से जुड़े किस्से याद किए
नारायण मूर्ति ने रतन टाटा से जुड़े किस्से याद किए

दिग्गज कारोबारी और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब नहीं रहे. उनका 86 साल की उम्र में निधन हो गया. रतन टाटा ने बुधवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. वहीं, इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने रतन टाटा से कंपैशनेट कैपेटलिज्म को लेकर सीखे एक सबक का जिक्र किया. 

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इंडिया टुडे टीवी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में नारायण मूर्ति ने उस पल को याद किया जब उन्होंने रतन टाटा को अक्षय पात्र रसोई का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया था, जो उनकी पत्नी सुधा मूर्ति द्वारा फंडेड एक परोपकारी पहल थी. इंफोसिस के संस्थापक ने कहा कि यह कार्यक्रम रतन टाटा का टाटा संस से रिटायर होने के बाद पहला पब्लिक प्रोग्राम था.

हुबली के प्रोग्राम में दो-ढाई दिन तक रुके थे रतन टाटा

नारायण मूर्ति ने कहा कि मैंने एक बार उन्हें (रतन टाटा को) अक्षय पात्र रसोई का उद्घाटन करने के लिए इन्वाइट किया था, जिसकी फंडिंग मेरी पत्नी सुधा ने की थी. रतन टाटा कर्नाटक के हुबली आए, वहां करीब दो-ढाई दिन तक रहे और उन्होंने हर समारोह में भाग लिया. 

नारायण मूर्ति ने बताया कि हुबली में रहने के दौरान रतन टाटा ने खुद को पूरी तरह से समारोह में डुबो लिया और युवाओं सहित सभी से बातचीत की. इसमें युवा, बुजुर्ग, अमीर और सामान्य लोग, नौकरशाह और मंत्री सभी शामिल थे. उन्होंने कहा कि ये मेरे लिए विनम्रता का सबक था, ये कंपैशनेट कैपेटलिज्म का सबक था. ये सबक था कि कैसे वह अपने दिल का एक हिस्सा उन लोगों के लिए रिजर्व रख सकते हैं, जो इतने भाग्यशाली नहीं हैं.

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13 साल पुराने कार्यक्रम का किया जिक्र 

इसी तरह की एक और घटना को याद करते हुए मूर्ति ने कहा कि उन्होंने रतन टाटा को लगभग 13 साल पहले दिल्ली में आमंत्रित किया था, जब वे एशिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे, इस कार्यक्रम में एशिया, अमेरिका और यूरोप की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के सीईओ आए थे, जहां नारायण मूर्ति ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग्स के अरेंजमेंट्स किए. वह चाहते थे कि रतन टाटा डिनर की मेजबानी करें और भाषण दें. 

नारायण मूर्ति ने कहा कि रतन टाटा मुंबई से आए थे. वह करीब 45 मिनट तक रुके और एक बेहतरीन डिनर का आयोजन किया. हालांकि वह बोलने में काफी संकोची थे, उन्होंने कहा 'मूर्ति, प्लीज मुझे बोलने के लिए मजबूर न करें'. हालांकि वह पूरी तरह विनम्र थे और उन्होंने सभी मेहमानों का बहुत स्नेह और सम्मान के साथ ख्याल रखा, लेकिन उन्होंने भाषण नहीं दिया. 

क्या है कंपैशनेट कैपेटलिज्म?

कंपैशनेट कैपेटलिज्म व्यवसायियों और समुदायों के बीच तालमेल बनाने का एक तरीका है. यह एक ऐसा व्यवसाय मॉडल है, जो सामाजिक और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का समाधान करता है. इसमें व्यवसायों को अपने कर्मचारियों, मानवता और पर्यावरण समेत सभी हितधारकों की सेवा करने पर भी विचार करना होता है. ये समाज पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के लिए पूंजीवाद को निष्पक्षता और समानता के सिद्धांतों के साथ जोड़ता है. कंपैशनेट कैपेटलिज्म की अवधारणा है कि व्यवसायों को सिर्फ मुनाफा कमाने से परे समाज में योगदान देना चाहिए.

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