नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के ताजा सर्वे के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में बच्चों के स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. हालांकि, इसमें वयस्क के स्वास्थ्य के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने 12 दिसंबर को भारतीय परिवारों के स्वास्थ्य के बारे में सर्वेक्षण 2019-20 के पहले चरण का आधिकारिक आंकड़ा जारी किए. दो चरणों में हो रहे इस सर्वे में छह लाख घरों को कवर किया गया है. इसमें जनसंख्या, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण से जुड़े इंडीकेटर्स पर जानकारी जुटाने के लिए घर-घर जाकर लोगों के इंटरव्यू लिए गए.
पहले चरण में 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए इस सर्वे के नतीजे जारी किए गए हैं. इनमें से ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कम वजन वाले वयस्कों की संख्या 2015-16 के मुकाबले कम हुई है. बच्चों के मामले में ये स्थिति बिल्कुल उलट है. पिछले पांच सालों में ठिगने (उम्र के हिसाब से कम लंबाई), कमजोर (लंबाई के हिसाब से कम वजन) और कुपोषित (उम्र के हिसाब से कम वजन) बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. बच्चों के स्वास्थ्य में एक दशक के सुधार के उलट यह स्थिति बनी है.
हालांकि, गैर-संक्रामक रोगों के मामले में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है, विशेष रूप से इस खोज के संदर्भ में कि डायबिटीज, हाइपरटेंशन और मोटापा कोविड-19 के साथ मिलकर हालात को और गंभीर बना रहे हैं और और मृत्यु दर को बढ़ा रहे हैं. आंकड़ों से पता चलता है कि ज्यादातर राज्यों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 18 में, हर पांच में से एक महिला और हर पांच में से एक पुरुष ज्यादा वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं. बिहार में वयस्क महिलाओं में मोटापे की दर 20 साल पहले 3.9% थी जो 2019-20 में बढ़कर 21.5% हो गई है.
अमीर राज्यों में भी डायबिटीज का स्तर बढ़ रहा है. 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से केरल और गोवा में हाई ब्लड शुगर रेट सबसे ज्यादा है. आंकड़े कहते हैं कि केरल में सभी वयस्क पुरुषों और महिलाओं में एक चौथाई से ज्यादा को हाई ब्लड शुगर है. लगभग हर बड़े राज्य में, हर पांच में से एक वयस्क को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है जो भविष्य में हृदय संबंधी रोगों को जन्म दे सकता है. 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में औसतन लगभग एक चौथाई पुरुष आबादी ब्लड प्रेशर की समस्या का सामना कर रही है और इसे नियंत्रित करने के लिए दवा लेती है.
बड़ी संख्या में लोगों को पर्याप्त पोषण न मिलने के साथ-साथ मोटापा और गैर संक्रामक रोगों की बढ़ी हुई दर की वजह से भारत दोहरे बोझ का सामना कर सकता है. नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे का दूसरा चरण कोरोना लॉकडाउन की वजह से रोक दिया गया था. इस चरण में 12 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों का सर्वे होना है. अब नवंबर में इसे फिर से शुरू किया गया है और मई 2021 में इसका नतीजा आने की उम्मीद है.