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'हेराल्ड जिन्न' फिर निकला! गांधी परिवार के खिलाफ कौन-कौन से केस दर्ज हैं?

लगभग 10 साल पुराने इस केस की जड़ें आजादी से पहले निकले एक अखबार से जुड़ी हैं, जिसे जवाहर लाल नेहरू ने निकाला था. इस केस में करोड़ों रुपये की जायदाद पर मालिकाना हक का विवाद है.

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राहुल गांधी से ED पूछताछ कर रही है.
राहुल गांधी से ED पूछताछ कर रही है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राहुल गांधी से ED ने की पूछताछ
  • सोनिया गांधी को भेजा गया नया समन

नेशनल हेराल्ड केस-2011: कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) आज यानी कि सोमवार को नेशनल हेराल्ड मामले (National Herald Case) में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए. इस मामले में नेशनल हेराल्ड के स्वामित्व वाली कांग्रेस प्रायोजित यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच हो रही है. वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को नया समन जारी किया है. नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने उन्हें 23 जून को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है. 

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बता दें कि दिसंबर 2015 में हाई प्रोफाइल नेशनल हेराल्ड केस में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सोनिया और राहुल गांधी शनिवार को पेश हुए और चंद मिनटों में ही जमानत लेकर बाहर भी आ गए. कोर्ट ने बिना किसी शर्त के उन्हें जमानत दे दी. सोनिया गांधी और राहुल गांधी को 50-50 हजार के मुचलके पर पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई.

हेराल्ड को लेकर इतिहास की तरफ नजर फिराएं तो कांग्रेस के पैसे से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी 1938 में बनी और तीन अख़बार चलाती थी... नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज़. लेकिन एक अप्रैल 2008 को ये अख़बार बंद हो गए.

मार्च 2011 में सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी ने यंग इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी खोली, जिसमें दोनों की 38-38 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी. बताया जाता है कि कंपनी को खड़ा करने का मक़सद एजेएल (AJL) पर मौजूद 90.21 करोड़ रुपए की देनदारियां उतारना था. पार्टी ने हेराल्ड हाउस में एक करोड़ रुपया और लगाया जो कभी एजेएल के पास होता था. इस मामले में सोनिया और राहुल के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी कोर्ट गए और संपत्ति के बेजा इस्तेमाल का केस दर्ज कराया. आइये बात करते हैं गांधी परिवार पर दर्ज चर्चित मामलों की...

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बीकानेर लैंड केस- 

यह पूरा मामला बीकानेर के कोलायत क्षेत्र में 275 बीघा जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़ा हुआ है. इस मामले की जांच ईडी में चल रही है. इस जमीन को बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के विस्थापित लोगों को अलॉट की किया जाना था. लेकिन इसे गलत तरीके से खरीदा गया. बीकानेर लैंड डील मामले में जोधपुर कोर्ट में सुनवाई चल रही है. यह मामला रॉबर्ट और उनकी मां मॉरिन वाड्रा से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है. 

मामला स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और बिचौलिए महेश नागर की याचिका से संबंधित है. 275 बीघा जमीन की खरीद-फरोख्त में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी मां मॉरिन वाड्रा घिरे हुए हैं, जिनकी गिरफ्तारी पर कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक लगाई गई थी. वाड्रा ने यह जमीन बीकानेर के कोलायत इलाके में खरीदी थी, लेकिन बाद में बेच दी. राजस्थान सरकार इस सौदे को पहले ही रद्द कर चुकी है. आरोप है कि जमीन गलत तरीके से निजी क्षेत्र को दी गई.  

प्रवर्तन निदेशालय ने सितंबर, 2015 में राजस्थान के बीकानेर में जमीन सौदे के मामले पर केस दर्ज किया था. ईडी ने मामले में प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की है और रॉबर्ट वाड्रा को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन 2018 में कंपनी ने इसके खिलाफ राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 

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वहीं जनवरी 2021 में आयकर विभाग के दल की ओर से बेनामी संपत्ति लेनदेन (निषेध) कानून के प्रावधानों के तहत करीब आठ घंटों तक वाड्रा से पूछताछ की गई और उनका बयान दर्ज किया गया. सूत्रों ने जानकारी दी है कि राजस्थान के बीकानेर में वाड्रा से संबंधित एक कंपनी द्वारा कुछ भूखंड खरीदे जाने के संदर्भ में पूछताछ की गई. इसी मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2015 में धनशोधन का मामला दर्ज किया था.

प्रवर्तन निदेशालय पहले भी इसको लेकर वाड्रा से पूछताछ कर चुका है. उसने 2019 में उनकी कंपनी 'स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' की 4.62 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी.  

मौजूदा स्थिति की बात करें तो राजस्थान हाई कोर्ट ने बीकानेर में भूमि घोटाले से संबंधित एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा अगली 5 अप्रैल तक बढ़ा दी है.

गुरुग्राम भूमि अधिग्रहण मामला- 

गुरुग्राम पुलिस ने एक लैंड डील मामले में वाड्रा के साथ ही हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ FIR दर्ज की है. यह मामला गुरुग्राम के खेड़की दौला में जमीन खरीद से जुड़ा है. सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा- 420, 120B, 467, 468 और 471 के तहत आरोप लगाए गए हैं. इसके अलावा प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री हुड्डा पर वाड्रा को जानबूझकर फायदा पहुंचाने का आरोप है. साथ ही गलत तरीके से जमीन आवंटित करने की भी बात कही गई है.

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आरोप है कि वाड्रा ने इसके जरिये हजारों करोड़ रुपये की कमाई की. माना जा रहा है कि ऐसे में हुड्डा की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं.

वाड्रा-DLF घोटाला 2012: 

2012 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ़ से 65 करोड़ का ब्याजमुक्त लोन लेने का आरोप लगा. ये आरोप भी लगे कि इस बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक फायदा पहुंचाना मकसद था. यह भी कहा गया कि इस दौरान केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई हिस्सों में बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं. 


(इनपुट- बिकास कुमार सिंह)

 

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