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चुनावी चंदा देने वाली कंपनियों का Raid से कनेक्शन! वित्त मंत्री बोलीं- ये सिर्फ कोरी कल्पनाएं

इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों को चंदा देने वाली टॉप 30 कंपनियों को देखा जाए तो करीब आधी कंपनियां किसी ना किसी वजह से केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर आई हैं और उनकी जांच की गई है. वहीं, चुनावी चंदा और जांच एजेंसियों के छापे के कनेक्शन को वित्त मंत्री ने कोरी कल्पना बताया है.

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर बयान दिया है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर बयान दिया है.

चुनाव आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों को मिले चंदे का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है. इसमें बड़ी और अहम जानकारियां सामने आई हैं. चुनावी बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों को चंदा देने वाली टॉप 30 फर्मों में से करीब आधी फर्में कभी ना कभी केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आई हैं. केंद्रीय एजेंसियों में प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो और आयकर विभागों समेत अन्य के नाम शामिल हैं. वहीं, चुनावी चंदा और जांच एजेंसियों के छापे के कनेक्शन को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण महज कोरी कल्पना बताया है.

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इन फर्मों की जांच की गहनता भी अलग-अलग है, जिसमें केस दर्ज करने से लेकर छापेमारी तक शामिल है. कुछ कंपनियों की संपत्ति तो प्रवर्तन निदेशालय ने जब्त कर ली है. चुनावी बॉन्ड के जरिए चंदा देने वाली जो 14 कंपनियां केंद्रीय या राज्य जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आई हैं, उनमें फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, हल्दिया एनर्जी लिमिटेड, वेदांता लिमिटेड, यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, डीएलएफ कमर्शियल डेवलपर्स लिमिटेड, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, चेन्नई ग्रीनवुड्स प्राइवेट लिमिटेड, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड, IFB एग्रो लिमिटेड, NCC लिमिटेड,  Divi S लेबोरेटरी लिमिटेड, यूनाइटेड फॉस्फोरस इंडिया लिमिटेड और अरबिंदो फार्मा का नाम शामिल है.

यह भी पढ़ें: India Today Conclave 2024: 'इलेक्टोरल बॉन्ड परफेक्ट नहीं, लेकिन पहले के सिस्टम से बेहतर', बोलीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

टॉप इलेक्टोरल बॉन्ड डॉनर्स और जांच एजेंसी के छापे पर क्या बोलीं निर्मला सीतारमण?

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शुक्रवार को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2024 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, जांच एजेंसी के छापे और चुनावी बॉन्ड के बीच कनेक्शन की बात करना सिर्फ एक 'धारणा' है. उन्होंने सवाल किया कि क्या पहले के सिस्टम 100 फीसदी परफेक्ट थे. 

वित्त मंत्री ने कहा, ईडी की छापेमारी के बाद पैसा दिया गया ये महज एक धारणा है. ये भी तो हो सकता है कि कंपनियों ने पैसा दिया हो, उसके बावजूद वहां ईडी की छापेमारी हुई हो. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह सिर्फ एक धारणा है कि ईडी ने जाकर उनके दरवाजे खटखटाए और वे खुद को बचाना चाहते थे, इसलिए वे पैसे लेकर आए. सवाल ये भी है कि क्या कोई आश्वस्त है कि ये पैसा बीजेपी को ही दिया गया? ये भी तो संभव है कि यह पैसा क्षेत्रीय पार्टियों को दिया गया हो.

इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वालीं 10 कंपनियां कौन हैं?

- फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज (₹ 1,368 करोड़)
- मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (₹ 966 करोड़)
- क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड (₹ 410 करोड़)
- वेदांता लिमिटेड (₹400 करोड़)
- हल्दिया एनर्जी लिमिटेड (₹ 377 करोड़)
- भारती ग्रुप (₹ 247 करोड़)
- एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (₹ 224 करोड़)
- वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (₹ 220 करोड़)
- केवेंटर फूड पार्क इंफ्रा लिमिटेड (₹195 करोड़)
- मदनलाल लिमिटेड (₹185 करोड़)

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चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली अन्य बड़ी कंपनियों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टोरेंट पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ कमर्शियल डेवलपर्स, अपोलो टायर्स, लक्ष्मी मित्तल, एडलवाइस, पीवीआर, सुला वाइन, वेलस्पन, सन फार्मा, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, डीएलएफ, पीवीआर, बिड़ला, बजाज, जिंदल, स्पाइसजेट, इंडिगो और गोयनका आदि शामिल हैं.

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